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पहले नेता तांगे से चुनाव प्रचार करते थे, अब लग्जरी वाहन से

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पहले नेता तांगे से चुनाव प्रचार करते थे, अब लग्जरी वाहन से
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- बुजुर्गों ने अपने अनुभव बताए, समय के साथ बदल गया चुनाव प्रचार का तरीका
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। चार दशक पहले और अब के चुनाव प्रचार में काफी बदलाव आया है। पहले नेता तांगा, इक्का से चुनाव प्रचार करते थे, लोग उनकी खातिरदारी गुड़ और पानी से करते थे। सरपंच के यहां पहुंचकर प्रत्याशी अपनी बात सादगी में रखते थे। अब मतदाताओं को प्रलोभन दिए जा रहे है। मतदाता आज भले ही प्रत्याशियों का खुला समर्थक करने से कतराते हों, लेकिन एक समय बच्चों की शर्ट पर लगे बिल्लों से मोहल्लों का रुझान पता चल जाता था। यह कहना है पहले और अब के दौर के चुनाव देखने वाले बुजुर्गों का।
गुरवलिया बाजार के 78 वर्षीय महावीर प्रसाद का कहना है कि पहले कांग्रेस और जनसंघ के बीच चुनाव होता था। पहले चुनाव परिणाम का इंतजार नहीं किया जाता। लोगों को जनप्रतिनिधियों का पता पहले चल जाता था। अब चुनाव में प्रत्याशी प्रलोभन देकर वोटरों को खरीदने का काम करते हैं। उनके दौर में विकास को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब जाति, धर्म, मजहब को प्राथमिकता दी जाती है। यह भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
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विजयपुर उत्तर पट्टी के 72 वर्षीय रमाशंकर चौरसिया बताते हैं कि अब बहुत बदलाव आया है। एक जमाना था जब मतदाता अपने क्षेत्र के ईमानदार, विकास करने वाले प्रत्याशी को समर्थन करता था, आज सब कुछ बदल गया है। उन्होंने कांग्रेस का दौर निकट से देखा है। उस समय प्रत्याशियों के पास प्रचार करने के संसाधनों का टोटा रहता था। प्रत्याशी ट्रैक्टर, बैल, तांगा से क्षेत्र में घूम-घूम कर वोट मांगा करते थे।
खलवापट्टी के 67 वर्षीय बच्चा लाल श्रीवास्तव ने कहा कि अब तो सब कुछ बदल गया है। प्रत्याशी एक नहीं, बल्कि सैकड़ों वाहन के काफिले के साथ प्रचार करते हैं। यह कोई विशेष दल का प्रत्याशी नहीं करता, सभी दलों के प्रत्याशी ऐसे ही करते हैं। संकल्प कुछ और लेते हैं और जीतने के बाद कुछ और करते हैं।
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लवकुश पूरब पट्टी के सदीक शाह 72 कहते हैं कि पहले नेताओं में सादगी भरी हुई थी अब दिखावा करते हैं। पहले बच्चों के बिल्लों से मोहल्लों का रुझान पता चल जाता था। अब चुनाव लड़ने वाले ताम-झाम लेकर घूमते हैं।
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