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मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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गण्डक नदी में खिचड़ी पर्व पर स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : KUSHINAGAR
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मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, बच्चों और युवाओं ने की पतंगबाजी
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सुबह स्नान दान के बाद तिल व चावल की लाई का लोगों ने किया सेवन
पडरौना। एक माह का खरमास बीतने के बाद शनिवार को जिले भर में मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। सुबह लोगों ने स्नान-दान के बाद तिल और चावल आदि की बनी लाई का सेवन किया। घरों में खिचड़ी बनाई गई। बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी को लेकर ज्यादा उत्सुकता देखी गई। इस मौके पर मंदिरों और नदी घाटों पर मेले जैसा माहौल रहा।
सुबह लोगों ने स्नान-दान के बाद पूजा-अर्चना की। उसके बाद चावल, मक्का, बाजरा, चिउड़ा से बनी लाई और तिल से निर्मित लड्डू का सेवन किया। पडरौना नगर सहित जनपद के विभिन्न हिस्सों में पतंगबाजी भी हुई। बच्चों और युवकों ने बाजार से पतंग, मांझा, धागे और चरखी खरीदी। उसके बाद छतों और मैदानों में जाकर पतंग उड़ाई। पूरे दिन पतंगबाजी होती रही।
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मकर संक्रांति के मौके पर नगर के भारतीय शिवाला मंदिर, बुढ़िया माई, रामकोला रोड स्थित साकेत बिहारी मंदिर में लोगों ने पूजा-अर्चना कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। यूपी-बिहार सीमा पर स्थित बांसी नदी में कई श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद पुराहितों में दान पुण्य किया।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार सेवरही क्षेत्र में खिचड़ी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने बांसी और गंडक नदी में स्नान कर मंदिरों में खिचड़ी चढ़ाया और गरीबों में दान-पुण्य किया। सेवरही सहित राजपुर, दुबौली, पिरोजहा, ब्रह्मपुर, दाहूगंज, परसा उर्फ सिरिसिया, जंगलीपट्टी, जवही दयाल, विरवट कोंहवलिया, दोमाठ, टिकुलिया, तिवारी पट्टी, बाकखास, बाघाचौर, सुमही संतपट्टी, पकड़ीयार पूरब पट्टी, मिश्रौली, अहिरौलीदान आदि गांवों में खिचड़ी का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया।
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श्रद्धालुओं ने बांसी व गंडक नदी के शिवाघाट, गोला घाट, दमकल घाट, पिपराघाट, पांडेयपट्टी घाट, गौरी घाट आदि घाटों पर स्नान किया और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर खिचड़ी चढ़ाई। कई लोगों ने गरीबों में खिचड़ी और वस्त्र आदि का दान किया। गांधी नगर दुर्गा मंदिर के पुजारी पं. नागेंद्रनाथ द्विवेदी ने बताया कि खिचड़ी स्नान दान का पर्व है। इस दिन नदियों में स्नान कर खिचड़ी चढ़ाने और गरीबों को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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