सुबह की पहली किरण के साथ भिक्षुओं की चांटिंग ने आयोजन की औपचारिक शुरुआत की। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कुशीनगर को एक बार फिर वैश्विक मंच पर स्थापित करने की कोशिश को बल दिया। पहले दिन जहां बौद्ध दर्शन, शांति और संवाद पर चर्चा हुई, वहीं असली नजर दूसरे दिन पर टिकी है, जब होटल इंडस्ट्री, एयरलाइंस और पर्यटन क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी एक मंच पर जुटेंगे।
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महा परिनिर्वाण मंदिर परिसर में कार्यक्रम के दौरान बुद्ध वंदना करते बौद्ध भिक्षु।स्रोत-सोशल मीडि
- फोटो : samvad
बौद्ध भिक्षुओं के मंत्रोच्चार से गूंजते महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव का भव्य आगाज हुआ। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस आयोजन में इस बार केवल धम्म और दर्शन की बात नहीं, बल्कि विकास, पर्यटन और निवेश की दिशा में ठोस पहल की उम्मीदें भी केंद्र में हैं।
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बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव की तर्ज पर पेंटिंग प्रतियोगिता करते बच्चे
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कॉन्क्लेव के साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि यह आयोजन कुशीनगर को वह गति दे पाएगा, जिसकी उम्मीदें 2021 में एयरपोर्ट उद्घाटन के समय जगाई गई थीं, लेकिन जो जमीनी हकीकत में पूरी नहीं हो सकीं।
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प्रभारी मंत्री का स्वागत करते डीएम महेंद्र सिंह तंवर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह की पहली किरण के साथ भिक्षुओं की चांटिंग ने आयोजन की औपचारिक शुरुआत की। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कुशीनगर को एक बार फिर वैश्विक मंच पर स्थापित करने की कोशिश को बल दिया। पहले दिन जहां बौद्ध दर्शन, शांति और संवाद पर चर्चा हुई, वहीं असली नजर दूसरे दिन पर टिकी है, जब होटल इंडस्ट्री, एयरलाइंस और पर्यटन क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी एक मंच पर जुटेंगे।
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महापरिविर्नाण मंदिर की जाते अतिथि और प्रशासनिक टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
माना जा रहा है कि यहीं से तय होगा कि कुशीनगर को केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक हब कैसे बनाया जाए। दरअसल, यह उम्मीदें नई नहीं हैं। कुशीनगर एयरपोर्ट के उद्घाटन के समय भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, बढ़ते विदेशी पर्यटकों और स्थानीय रोजगार के नए अवसरों के दावे किए गए थे।
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महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रभारी मंत्री और अन्य लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लेकिन हकीकत यह रही कि अपेक्षित संख्या में उड़ानें नहीं मिल सकीं और पर्यटन कारोबार भी उम्मीदों के अनुरूप नहीं बढ़ पाया। अब एक बार फिर वही सेक्टर एयरलाइंस, होटल, टूर ऑपरेटर और निवेशक कॉन्क्लेव के जरिए सक्रिय होते दिख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चाओं के साथ ठोस रोडमैप तैयार करने की बात भी जोर पकड़ रही है।
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प्रभारी मंत्री, विधायक व डीएम संग अन्य जनप्रतिनिधि
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कॉन्क्लेव बना ‘पॉलिसी टेस्ट’, जमीन पर उतरा तो बदलेगी तस्वीर
प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यह कॉन्क्लेव महज सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक तरह से पॉलिसी टेस्ट भी है। यदि यहां बने मॉडल और योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो कुशीनगर न सिर्फ बौद्ध पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनेगा, बल्कि पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी हालांक, यदि यह आयोजन भी केवल चर्चाओं तक सीमित रह गया, तो यह भी एयरपोर्ट उद्घाटन की तरह अधूरी उम्मीदों की सूची में शामिल हो सकता है।
बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव में शामिल होने पहुंचे
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अधूरी उड़ानें, अधूरे सपने… अब फिर जगी उम्मीद
एयरपोर्ट शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन सीमित उड़ानों, बाद में सेवाओं के ठप पड़ने और कमजोर मार्केटिंग के चलते पर्यटन में अपेक्षित उछाल नहीं आ सका।
अब कॉन्क्लेव के जरिए उसी कमी को दूर करने की चुनौती सामने है। देखना होगा कि इस बार की पहल उम्मीदों को हकीकत में बदल पाती है या फिर यह भी सिर्फ घोषणाओं तक सिमट कर रह जाती है।