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जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बेहतर हुईं इलाज की सुविधाएं

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जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बेहतर हुईं इलाज की सुविधाएं
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- सात से बढ़ाकर 30 की गई एसएनसीयू में वार्मर की संख्या
- अलग वार्ड भी हुआ तैयार, भरपूर जगह के चलते दूर हुई परेशानी
- सभी नई मशीनें लगाई गईं
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज में हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए इसकी क्षमता वृद्धि कर दी गई है। पहले इसमें बच्चों को भर्ती करने के लिए सात वार्मर ही थे, लेकिन अब एसएनसीयू के लिए अलग वार्ड तैयार करने के साथ ही 30 नए वार्मर भी मंगा लिए गए हैं। अभी इसमें 25 नवजात भर्ती हैं।
जन्म के बाद जिन बच्चों का वजन कम होता है, किसी प्रकार का इंफेक्शन हो अथवा प्री-मेच्योर हो तो ऐसे बच्चों को एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में रखना पड़ता है। जन्म के बाद यहां बच्चों को उचित तापमान में रखा जाता है ताकि उनका शरीर ठंडा न पड़े। इसके अलावा जिन बच्चों को पीलिया होता है, उन्हें भी फोटोथिरेपी नाम की मशीन में रखा जाता है, जो एसएनसीयू में लगाई जाती है। ऐसे बच्चों को कई दिनों तक भर्ती रखना पड़ता है। जिला अस्पताल के एसएनसीयू में तो ऐसे बच्चों का इलाज निशुल्क हो जाता है, लेकिन निजी अस्पतालों के एसएनसीयू में इलाज पर खर्च काफी अधिक आता है। यही वजह है कि जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या अधिक रहती है। पिछले दिनों तो एक-एक वार्मर पर तीन-तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ता था।
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इसी समस्या को देखते हुए डीएम के निर्देश पर एसएनसीयू को अलग हाल में शिफ्ट किया गया है, जहां भरपूर जगह है तथा एसएनसीयू में वार्मर की क्षमता वृद्धि करते हुए सात से बढ़ाकर 30 कर दिया गया है। सोमवार को एसएनसीयू में 25 बच्चे भर्ती किए गए थे। उनका उपचार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश यादव कर रहे थे।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने कहा कि एसएनसीयू में नवजात बच्चों के इलाज में हो रही असुविधा को देखते हुए इसकी क्षमता बढ़ाई गई है। सात से बढ़ाकर इसमें अब 30 वार्मर लगाए गए हैं। इससे नवजात बच्चों के इलाज में दिक्कतें नहीं होंगी। एसएनसीयू में जन्म से लेकर एक माह तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है।
नवजात बच्चों के लिए इस स्थिति में पड़ती है वार्मर की जरूरत
- जो बच्चे जन्म के समय रोते नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें झटके आने की आशंका रहती है।
- जिन बच्चों का वजन कम रहता है या प्री-मेच्योर होते हैं।
- इंफेक्शन की वजह से बीमार हों, दूध न पीते हों।
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