तमकुहीराज। कुशीनगर के रास्ते बिहार, पश्चिम बंगाल और आसाम तक पशुओं की तस्करी की जा रही है। तमकुहीराज थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों के गांवों में पशु तस्कर पशुओं को एकत्र कर रहे हैं। जब संख्या छह से अधिक की हो जा रही है तो उन्हें वाहनों पर लादकर रात के अंधेरे में बिहार भेज दे रहे हैं।
वहां पहुंचने के बाद प्रतिबंधित पशुओं को लेकर तस्कर बंगाल और आसाम तक पहुंच जा रहे हैं। पशुओं को ठिकाने तक पहुंचाने के बाद तस्करों को मुंहमांगी कीमत तो मिल ही रही है, ऊपर से सही सलामत खेप पहुंचने पर उन्हें इनाम भी दिया जा रह है।
सूत्रों का कहना है कि तमकुहीराज क्षेत्र के कई सफेदपोश भी तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्हीं की बदौलत एक से दूसरे थाना क्षेत्र के रास्ते पशुओं की खेप आसानी से बिहार भेजी जा रही है। यही नहीं, पशु तस्करों में भी अलग-अलग गिरोह है।
दूसरे का धंधा मंदा करने के लिए एक गिरोह दूसरे गिरोह की रेकी कर पुलिस की मुखबिरी भी करते हैं। संगठित होकर पशुओं की तस्करी करने वाले लोगों को पुलिस की एक-एक कमजोरियों की भी जानकारी है और वह इसका फायदा भी उठाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि तस्करी के धंधे को सुचारु रूप से चलाने के लिए तस्कर कानून की बारीकियों का फायदा उठाना जानते हैं। जब कभी हाईवे और बिहार को जोड़ने वाले अन्य ग्रामीण मार्गों पर पुलिस की चौकसी बढ़ती है तो ये तस्करी का पैतरा व प्रारूप ही बदल देते हैं।
हाईवे स्थित जिन थानों व चौकियों से तालमेल बेहतर नहीं है, ऐसे इलाकों में ये प्रतिबंधित पशुओं को तिरपाल से ढंक कर ले जाते हैं। कुछ तस्कर निर्धारित मानक के अनुरूप एक या दो पशुओं को बिहार से सटे गांवों में पहुंचाते हैं। संख्या छह से अधिक होते ही इन्हें बिहार पहुंचा दिया जाता है। तस्करी के मार्गों पर युवकों की कई टीम संगठित रूप से काम करती है। कोई परेशानी होने पर तत्काल एक दूसरे से संपर्क स्थापित कर उसका हल भी निकाल लेते है।
वहीं, कभी-कभी पशु तस्कर पुलिस टीम से भी उलझ जाते हैं, लेकिन रसूख व रुपयों के कारण कार्रवाई की जद से बाहर निकल जाते हैं। कुछ धंधेबाज इतने शातिर हैं कि मुकदमों व अन्य स्रोतों से कानून की बारीकियों को भलीभांति जानने के बाद वह बेखौफ होकर धंधे को रफ्तार देते हैं।
हर माह पहुंच जाती है खाते में रकम : दरभंगा, मुजफ्फरपुर आदि स्थानों पर अंडरग्राउंड होकर पशुओं को पूर्वांचल के इलाकों से लाकर बिहार की सीमा तक लाने का फरमान स्थानीय बड़े तस्करों तक पहुंचता है। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए बड़े तस्कर पिकअप के लिए एक निर्धारित व्यक्ति को टास्क देते हैं।
इसके बाद पिकअप गाड़ी मालिक की व्यवस्था की जाती है। इनसे संपर्क कर पैसे की लालच में इनसे गाड़ी ले ली जाती है और फिर इससे पशुओं की तस्करी की जाती है। जबतक किसी मामले में गाड़ी पकड़ा न जाए, किसी को इसकी भनक नहीं लगती। सूत्रों ने बताया कि तस्करी का यह ट्रेंड लंबे समय से चल रहा है। इसके लिए पुलिस को तफ्तीश की जरूरत हैं।