वाल्मीकि नगर बराज से शनिवार को पानी नहीं छोड़ा गया। इससे गंडक नदी का जलस्तर कम हो गया है। इससे तटबंधों के किनारे रहने वाले लोगों को राहत मिली। बंधों की सुरक्षा के लिए परेशान अधिकारियों ने मरम्मत कार्य में तेजी ला दी है। हालांकि नेपाल में बारिश होने पर पानी का डिस्चार्ज कभी भी बढ़ सकता है।
क्षेत्र के पिपराघाट, जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवही दयाल, ततवा टोला, बाघखास, विरवट कोंहलिया, बाघा चौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला और डीह टोला में बांध पर गंडक नदी का दबाव कम होने लगा है।
इसके बाद भी कटान का खतरा बना हुआ है। जलस्तर घटने से पिपराघाट के मुसहरी, इमिलिया, तीनटोलियां, जोगनी, रणजीत, मोतीराय, शिव, उपाध्याय , तेजू, हनुमान, देवनारायण, दहारी, तवकल व भंगी टोला सहित अन्य गांवों पर बाढ़ का खतरा कम हो गया है। लेकिन फसल पानी में डूबी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि अधिक दिनों तक पानी भरा रहा तो फसल गल जाएगी।
बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी, जेई चंद्रप्रकाश, रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव अपनी टीम के साथ परियोजना के अधूरे कामों को पूरा करने में जुट गए हैं। बांध के किनारे बसे गांवों के दीनानाथ सिंह, ब्रह्मा शर्मा, कृष्णा निषाद, संजय सिंह, शंकर साहनी, पप्पू सिंह, शैलेंद्र चौधरी, धर्मेंद्र शर्मा, प्रभुनाथ यादव आदि का कहना है कि फिलहाल बाढ़ का खतरा टल गया है, लेकिन जलस्तर बढ़ने और घटने का सिलसिला तीन माह तक जारी रहेगा।
बाढ़ खंड एसडीओ एसके प्रियदर्शी ने कहा कि बचाव कार्य जारी है। तटबंधों पर चौकसी भी बरती जा रही है।