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CAT गड़बड़ी: कोझिकोड की पुलिस आज लखनऊ में

Wed, 03 Jul 2013 12:45 PM IST
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क
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कोझिकोड के चेव्यूर सर्किल ऑफिसर प्रकाशन पाण्डनियल के नेतृत्व में एक टीम लखनऊ में वेब वेवर्स के ठिकाने को खंगालने और यूपी में भुक्तभोगी छात्रों से बात करने के लिए आ रही है। वेब वेवर्स के प्रमुख हसन की तलाश राजस्थान में की जा रही है।
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इजाद होगा नया फॉर्मूला
देश भर के 13 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) व प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के रिजल्ट को अब तक क्रॉस चेक करने का कोई तरीका ईजाद न किए जाने पर सभी हैरान हैं। लखनऊ की वेब वेवर्स ने रिजल्ट को वेबसाइट www.catiim.in पर अपलोड करने से पहले टैम्पर कर दिया। भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न हो, इसके लिए भी उपाय खोजे जा रहे हैं।

बनाई गई कमेटी
कैट में हुई गड़बड़ी की जांच के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी का चेयरमैन आईआईएम त्रिचरापल्ली के चेयरमैन एम. दामोदरन को बनाया गया है। वे नई दिल्ली में बुधवार को बैठक करेंगे। इसमें कैट को फूलप्रूफ बनाने के उपाय भी खोजे जाएंगे। इस बार कैट के रिजल्ट में टैम्परिंग कर 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ाए जाने के मामले के बाद उन बिंदुओं पर भी चर्चा की जाएगी कि कहां-कहां चूक हुई और अब आगे इसे किस तरह सुधारा जाए।
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आखिर कौन लेगा रिजल्ट की जिम्मेदारी ?
कैट जैसी हाई प्रोफाइल परीक्षा में सेंधमारी से आईआईएम व टॉप बिजनेस स्कूल भी सकते में हैं। फिलहाल इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या कैट का रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड करने की जिम्मेदारी वही आईआईएम निभाए जिसने कैट का आयोजन करवाया है। दूसरा यह कि कैट के लिए कोई स्थायी व्यवस्था देश भर के आईआईएम में से ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपी जाए और इसके लिए एक अलग सेल ही बना दिया जाए।

तीसरा बिंदु यह कि कैट के रिजल्ट की जो मास्टर सीडी प्रोमेटिक कंपनी द्वारा आईआईएम को दी जाती है, उसे उन सभी बिजनेस स्कूलों को भी दिया जाए जो एक निश्चित फीस भरकर कैट में अभ्यर्थियों की पूरी डिटेल मांगते हैं।

देश भर में लगभग 194 बिजनेस स्कूल हैं जो कैट के परसेंटाइल के अनुसार ही छात्रों को दाखिला देते हैं। इनमें से 46 ऐसे हैं जो एक निश्चित फीस भरकर कैट में अभ्यर्थियों का डाटा आईआईएम से मांगते हैं। फिलहाल इस परीक्षा में अब आगे किसी भी तरह की टैम्परिंग की कोई गुंजाइश न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाने ही होंगे।

फूलप्रूफ उपाय पर होगा जोर
अभी कैट का जो रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए दिया जाता है, वही अपलोड होने के बाद सभी के लिए सही माना जाता है। अभी तक इस तरह के ‘खेल’ के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था कि वेबसाइट पर रिजल्ट अपलोड करने से पहले टैम्परिंग कर नंबर बढ़ाए जा सकते हैं।

फिलहाल एम. दामोदरन की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी इन बिंदुओं पर गहन चर्चा करेगी कि आखिर कहां-कहां गड़बड़ी हुई और किन-किन स्तरों पर क्रॉस चेक करने की व्यवस्था की जा सकती है।

अरे! अफाक ने यह खेल क्यों कर दिया?
कैट का आयोजन करने वाले आईआईएम कोझिकोड में इस समय यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर अफाक नाम के शख्स ने किसके इशारे पर यह खेल कर दिया। अपने व्यवहार से उसकी घुसपैठ अंदर तक हो गई थी। अब सभी सन्न हैं। क्या इस छोटी सी कंपनी को हथियार बनाकर किसी ने बड़ा खेल तो नहीं किया? इसमें कोचिंग संचालकों की तो बड़ी भूमिका नहीं है? कहीं इस गड़बड़ी की साजिश साल भर पहले से तो नहीं रची जा रही थी?

चूका तो आईआईएम कोझिकोड भी!
कहीं न कहीं आईआईएम कोझिकोड से भी चूक हुई है कि उसने लखनऊ की वेब वेवर्स कंपनी को कैट की वेबसाइट मेंटेन करने का ठेका दिया लेकिन उस पर कोई राडार नहीं लगाया। इससे पहले आईआईएम लखनऊ ने जब कैट करवाया था तो इसी वेब वेवर्स की निगरानी करने के लिए बंगलूरू की एक आईटी कंपनी का सहारा लिया था।
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