उत्तर प्रदेश के समस्त राजस्व न्यायालय अगले महीने तक कंप्यूटराइज्ड प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) के दायरे में आ जाएंगे।
वादकारियों को अपने मुकदमों से जुड़ी सभी सूचनाएं घर बैठे आनलाइन अपने कंप्यूटर पर या पास के लोकवाणी केंद्र पर मिल सकेगी।
राजस्व विभाग ने इस संबंध में तैयारी तेज कर दी है। जिलों के अफसरों को मुकदमे से जुड़े ब्यौरे 17 जून तक विभाग के पोर्टल पर दर्ज करने का आखिरी मौका दिया गया है।
इसके बाद विभाग अन्य औपचारिकताएं पूरी करवाकर इस सुविधा को आनलाइन कर देगा।
राजस्व विभाग ने न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति, वादों की सुनवाई की तारीख, अंतरिम सुनवाई और अंतिम फैसले की सुनवाई की प्रति आम लोगों को आनलाइन सुलभ कराने के लिए सीएमएस लागू करने का फैसला किया था।
पहले चरण में प्रदेश के 25 जिलों में यह सेवा शुरू की जा चुकी है। हालांकि अभी इसके सभी ब्यौरे आम लोगों के लिए सुलभ नहीं हैं।
सभी ब्यौरे पूरे प्रदेश में सीएमएस लागू करने के बाद आम लोगों के लिए सुलभ होंगे।
पेशकार और पीठासीन देंगे काम पूरा होने का प्रमाणपत्र
राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव अनिल कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार राजस्व न्यायालयों के पेशकारों को पोर्टल पर समस्त वादों को दर्ज कर लिए जाने संबंधी प्रमाणपत्र देना होगा।
वे यह प्रमाणपत्र आनलाइन उपलब्ध कराएंगे। पेशकार के प्रमाणपत्र देने के बाद न्यायालयों के समस्त पीठासीन अधिकारी इसी तरह का प्रमाणपत्र देंगे।