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'बनारस में मोदी से 50 हजार वोट से आगे निकले केजरीवाल'

Tue, 22 Apr 2014 01:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के लिए आईआईटी से पढ़े गोपाल मोहन कितने अहम हैं, ये वो बखूबी जानते हैं। जब केजरीवाल ने दिल्ली में 15 साल की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 26 हजार वोट से हराया, तो सभी दंग रह गए थे।

उनके प्रचार अभियान का जिम्मा मोहन ने संभाला था और अब वो बनारस में केजरीवाल के लिए यही काम देख रहे हैं। एचटी को दिए इंटरव्यू में मोहन ने कहा कि बनारस में उनके सामने ज्यादा बड़ी चुनौती है, लेकिन पार्टी को भरोसा है कि केजरीवाल, मोदी को हराने में कामयाब रहेंगे।
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मोहन को अलग तरह की तैयारी करनी पड़ रही है, लेकिन उनका आत्मविश्वास अब भी कायम है। आइए गौर करें मोहन से हुए सवाल-जवाब परः

'बनारस ज्यादा बड़ी लड़ाई'

दिल्ली की तुलना में यह काम कितना मुश्किल है?

यह निश्चित रूप से ज्यादा बड़ी लड़ाई है। दिल्ली में हमारे पास चुनाव प्रचार की योजना तैयार करने के लिए पूरा वक्‍त था। दिल्ली में हमारी मौजूदगी थी। लोग जनलोकपाल ‌आंदोलन और बिजली-पानी के बढ़े हुए बिलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की वजह से हमें जानते थे। वो शहरी इलाका था। लोग मान रहे थे कि हम सरकार बना सकते हैं।

'50 हजार मत से आगे'

बनारस में आप कैसा प्रदर्शन कर सकते हैं?

बहुत अच्छा। जब हमने अपना अभियान शुरू किया था, तो हम भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी से दो लाख वोट से पीछे थे। बुधवार यानी 16 अप्रैल को हमारा डोर टू डोर कैम्पेन बनारस के 3.14 लाख घरों में से 80 हजार तक पहुंच गया और हमें महसूस हुआ कि यह अंतर 50 हजार वोट रह गया है।

आज यानी सोमवार को हम 1.7 लाख मकानों तक पहुंचे और अब हम मानकर चल रहे हैं कि हम 50 हजार वोट आगे हैं। हमारे सर्वे से पता चला है कि बड़ी तादाद में लोग मोदी को पसंद नहीं करते। हमें इन लोगों का दिल जीतना है।

'बनारस में मिलेगी जीत'

क्या यह सब इतना आसान है?

करीब 1500 लोग डोर टू डोर कैम्पेन में शामिल हैं। यह काफी वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। सभी लोग हमारे पक्ष में नहीं हो सकते, लेकिन इनमें से ज्यादातर ने सहयोग के संकेत दिए हैं।

मोदी के समर्थकों को अपनी तरफ लाना एक बड़ी चुनौती है। नई दिल्ली सीट पर मार्जिन को लेकर मेरा अंदाजा सटीक बैठा था। मुझे विश्वास है‌ कि इस बार भी मेरा आकलन सही साबित होगा।

पांच नेताओं को इन्हें जीतने का जिम्मा

नई दिल्ली की तुलना में बनारस काफी बड़ी जगह है...

जी हां और हम उसके मुताबिक ही इससे निपट रहे हैं। वाराणसी लोकसभा सीट के तहत कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें तीन शहरी और दो ग्रामीण हैं।

मनीष सिसोदिया, दिलीप पांडे, दुर्गेश पाठक, कपिल मिश्रा और गुलाब सिंह जैसे पांच नेताओं को इन्हें जीतने का जिम्मा दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतने या लड़ने वाले करीब 14 विधायक भी यही हैं। साथ ही दिल्ली के हमारे चुनाव ‌अभियान प्रबंधक भी हैं।

AAP की रणनीति क्या

आम आदमी पार्टी की मुख्य रणनीति क्या है?

कई हैं। चुनाव प्रचार अभियान अब आक्रामक हो चला है। केजरीवाल नुक्कड़ सभाओं और पदयात्रा पर फोकस कर रहे हैं। दूसरी पार्टी के उम्मीदवारों से उलट वो सवाल ले रहे हैं और जवाब दे रहे हैं। चुनाव प्रचार अभियान के अंतिम पांच दिन वाले रोड शो करेंगे और बड़ी रैलियों को संबोधित करेंगे। हमें उम्मीद है कि मोदी बनारस में ज्यादा वक्त नहीं गुजार पाएंगे, क्योंकि का चुनाव प्रचार कार्यक्रम काफी व्यस्त है। इससे केजरीवाल को फायदा होगा।

आम आदमी पार्टी की मजबूती क्या है?

हमारी सबसे बड़ी ताकत 10 हजार स्‍थानीय वॉलेंटियर हैं। करीब 3 हजार लोगों ने बाहर से यहां आने को लेकर संपर्क कर रहे हैं। हमें गुजरात से भी वॉलेंटियर मिल रहे हैं। जब बनारस के लोग गुजरात के लोगों से गुजरात की सच्चाई सुनेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि असल मोदी क्या है।
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'25 से 30 लाख रुपए खर्च करेंगे'

AAP के सामने मुख्य अवरोध क्या हैं?

डोर टू डोर अभियान में हमारी रफ्तार कुछ सुस्त रही है। अब तक हमें पहला दौर खत्म कर लेना चाहिए था। हमारा लक्ष्य हर घर में कम से कम तीन बार पहुंचना है।

लेकिन हमारा बजट इसकी इजाजत नहीं देता। हम 25 से 30 लाख रुपए खर्च करेंगे। दिल्ली से उलट यहां केवल पांच ऑटोरिक्‍शा प्रचार कर रहे हैं। प्रशासन से इजाजत लेना काफी मुश्किल हो रहा है।
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