तापमान दिनोंदिन चढ़ता जा रहा है। इस समय फसल को सिंचाई की भी जरूरत है, लेकिन सिंचाई विभाग के रजबहों और माइनरों में सूखा पड़ा है। पानी की आपूर्ति न होने के कारण किसानों को सिंचाई के संकट से जूझना पड़ रहा है।
सिंचाई विभाग ने जिले में 497.102 किमी लंबा नहरों का जाल बिछा रखा है। इसमें से 64.88 किमी सिंचाई खंड कौशाम्बी, 101.317 किमी सिंचाई खंड फतेहपुर और 106.905 किमी लंबी नहरों की देखरेख की जिम्मेदारी निचली गंगानहर फतेहपुर खंड के पास है। जनपद में 74240 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है। वैसे भी यह वक्त फसलों की सिंचाई का रहता है। इस बार मौसम के तेवर तल्ख होने के कारण पानी की जरूरत और अधिक पड़ रही है। किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई करनी है, लेकिन नहरों में पानी ही नहीं है। कौशाम्बी ब्लॉक की बिदांव, कनैली, बेरौचा माइनर हो या फिर नेवादा ब्लॉक के गांवों से होकर गुजरी सरायअकिल माइनर। अमूमन सिंचाई विभाग के हर डिवीजन की नहरों का यही हाल है। जरूरत के वक्त पानी न मिलने से किसान परेशान हैं।
1.28 करोड़ रुपये किए गए हैं खर्च
इस वर्ष सिंचाई विभाग ने 329.211 किमी लंबी नहर की सिल्ट की सफाई कराई है। इसमें 1.28 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सफाई में ठेकेदारों की जमकर मनमानी भी की। कई जगह जेसीबी से सिल्ट निकाल कर पटरी पर डाल दिया और चले गए। उसे बराबर भी नहीं कराया, जिसका उदाहरण सरायअकिल माइनर है। इस माइनर में जमी हुई सिल्ट देखकर तो लगता ही नहीं कि सफाई कराई गई है। ऐसी ही कई अन्य माइनरें भी हैं, जिनकी जांच हो तो सिल्ट के नाम पर हुई गड़बड़ी की पोल खुल जाएगी।
रोस्टर के मुताबिक इस समय नहरों में पानी की आपूर्ति बंद की गई है। तीन या चार दिन बाद फिर से पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
जगदीश लाल, एक्सईएन, सिंचाई खंड कौशाम्बी