बताया गया कि घर के तहखाने में अवैध असलहे छिपाकर रखे गए थे। ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस ने घर से छह असलहे व चापड़ और चाकू बरामद करने का दावा किया। इस बाबत अधिवक्ता अब्दुल कादिर का कहना है राजूपाल हत्याकांड में अब्दुल कवि का नाम प्रकाश आने के बाद वह घर कभी नहीं आया। परिवार ने उसे जायदाद से बेदखल भी कर दिया है। यहां तक की लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन मुकदमे में परिवार का कोई सदस्य पैरवी तक नहीं करता। उमेश पाल हत्याकांड के बाद एक मार्च को अचानक कई थानों की फोर्स उनके घर पहुंची। उस दिन वह मऊ-मानिकपुर के विधायक के यहां तेरहवीं भोज में थे। पत्नी ने फोन करके बताया कि पुलिस आई है और घर की तलाशी ले रही है।
इस पर उन्होंने पत्नी को वीडियो बनाने के लिए कहा। पत्नी ने वीडियो बनाना चाहा तो पुलिस ने मोबाइल छीन लिया। इसके बाद पुलिस पिता की लाइसेंसी बंदूक, तीन बाइक, ट्रैक्टर व चार मोबाइल लेकर चली गई। शुक्रवार की शाम चार बजे फिर कई थानों की फोर्स पहुंची और महज एक घंटे में ही घर का समान बाहर निकालने की मोहलत दी। इसके बाद पुलिस ने जेसीबी व पोकलैंड से घर काे ध्वस्त करा दिया। घर के अंदर रखा सामान भी नष्ट हो गया है। अब्दुल कादिर ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। फिलहाल अब्दुल कादिर का परिवार पड़ोस में रहने वाले एक रिश्तेदार के यहां दो कमरों में शरण लिए है।
15 कमरों का था घर, दो कमरे में सिमटी जिंदगी
भखंदा में अब्दुल गनी के पैतृक घर में 15 कमरे बने थे। अब्दुल कादिर ने बताया कि उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन पर भाइयों से पैसा लेकर घर बनवाया था। अब परिवार के लोग पड़ोसी रिश्तेदार के यहां पनाह लिए हैं। रहने के लिए दो कमरे मिले है।