सिराथू इलाके के वैदिक संस्कृत महाविद्यालय सैनी के प्राचार्य कुलदीप नारायण जालसाजी में फंस गए हैं। उन पर कूट रचित अभिलेखों के सहारे नौकरी हथियाने का आरोप है। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर प्रबन्ध समिति ने उनकी नियुक्ति रद कर दी है। इसे लेकर महाविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।
गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय सैनी में कुलदीप नारायण को 26 जुलाई वर्ष 2016 में प्राचार्य नियुक्त किया गया था। पिछले दिनों उनके खिलाफ फर्जी अभिलेखों के सहारे प्राचार्य की नौकरी हथियाने की शिकायत मिली थी। प्राचार्य ने अपने आवेदन में भवंस मेहता डिग्री कॉलेज भरवारी में संविदा पर पांच साल तक अध्यापन कार्य करने का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया गया था।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रबंध समिति ने 16 अक्तूबर 2021 को जरिए आरटीआई भवंस मेहता डिग्री कॉलेज भरवारी से सूचना मांगी। जवाब में बीएस मेहता कॉलेज की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र पर दर्ज हस्ताक्षर फर्जी बताए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि वर्ष 1998 से 2016 तक कुलदीप नारायण भवंस मेहता विद्याश्रम में शिक्षक थे। जहां उनका पीएफ भी कटा है।
इस पर गुरुकुल के सभापति ने प्रबंधक दिलीप कुमार, सहायक प्रबंधक इंद्रजीत कुमार व प्रबंध समिति के सदस्य रमेश केसरवानी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। जांच में समिति को अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी मिला। इस पर प्रबंध समिति ने 16 जनवरी को बैठक कर प्राचार्य की नियुक्ति रद करने का फैसला ले लिया। समिति ने डीआईओएस, जेडी, कुलपति व कुलसचिव को भी पत्र भेजकर निर्णय से अवगत करा दिया है।