इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की अवधरानी पटेल आठ अगस्त 2019 को अध्यक्ष चुनी गईं। कार्यकाल पूरा होने के बाद तीन जुलाई 2021 को हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कल्पना सोनकर विजयी हुईं। कल्पना ने 12 जुलाई शपथ ग्रहण कर कार्यभार संभाला। एक साल पूरा होते ही इनके खिलाफ भी सदस्य बवावती तेवर अपनाने लगे थे। लेकिन उस वक्त कतिपय सियासी कारणों से कल्पना की कुर्सी बच गई।
इसी बीच सरकार ने दो साल से पहले अविश्वास नहीं लाने का नया कानून बना दिया। नतीजन सदस्य खामोसी के साथ वक्त का इंतजार करने लगे। दो साल पूरा होते ही 26 जुलाई को 26 सदस्यीय सदन के 20 सदस्यों ने डीएम से मिलकर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास का हलफनामा सौंप दिया। अध्यक्ष के प्रतिनिधि ने हलफनामे पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर सवाल खड़ा किया तो डीएम ने दो अगस्त को अभिलेखीय मिलान के लिए सदस्यों को नोटिस जारी कर दी। मौजूदा राजीनकि समीकरण को देखते हुए माना जा रहा है कि नाराज खेमा अपने मकसद में सफल हो जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो आठ साल के भीतर पांचवे अध्यक्ष की ताजपोसी तय मानी जा रही है।
पिछले कार्यकाल में तीन अध्यक्ष व चार प्रशासक
जिला पंचायत का पिछला कार्यकाल अब तक का सर्वाधिक उठापटक वाला रहा। पांच साल के भीतर तीन अध्ययक्ष चुने गए। चार बार प्रशासकों को जिला पंचायत की कमान संभालने का मौका मिला।
अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा सदस्यों के विद्रोह पर पार्टी ने साधी चुप्पी
जिला पंचायत कौशाम्बी में अध्यक्ष समेत छह सदस्य भारतीय जनता पार्टी के हैं। इनमें से पांच सदस्यों ने हलफनामा सौंपकर अपने ही पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास जाहिर किया है। अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी इस मामले में चार दिन बीतने के बावजूद चुप्पी साधे हुए है। इसे लेकर सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है।
जनपद की 26 सदस्यीय जिला पंचायत के चुनाव में सत्ताधारी दल भाजपा के छह सदस्य निर्वाचित हुए थे। इनमें अध्यक्ष कल्पना सोनकर के अलावा तूफान सिंह, रामनरेश, पूनम मौर्या, मीनू साहू और अर्चना निषाद शामिल हैं। महज छह सदस्यों वाली पार्टी उस वक्त किसी तरह अपना अध्यक्ष निर्वाचित कराने में सफल रही थी।
वक्त गुजरने के साथ ही अध्यक्ष ने दूसरे दलों के सदस्यों का भरोसा जीतना तो दूर अपनों का भी विश्वास खो दिया। इसकी बानगी 26 जुलाई को साफ देखने को मिली। दरअसल, डीएम के समक्ष अविश्वास का हलफनामा सौंपने वाले 20 में भाजपा के भी पांचों सदस्य शामिल हैं। अध्यक्ष के खिलाफ अपने ही पार्टी के सदस्यों द्वारा मोर्चा खोले जाने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला पंचायत के अंदर चल रही इस अंतर कलह पर पार्टी पूरी तरह से मौन है।
सदस्यों ने हलफनामा देने से पहले कोई चर्चा नहीं की थी। इस बाबत पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों से चर्चा की जाएगी। जो भी शिकायते हैं आपस में बैठकर दूर कर दी जाएंगी। संगठन में कोई भी विघटन की स्थिति नहीं है। - अनीता त्रिपाठी- जिलाध्यक्ष