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सरायअकिल विद्युत उपकेंद्र में जान हथेली पर ड्यूटी करते हैं कर्मचारी

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विद्युत उपकेंद्र सराय अकिल में अफसर व कर्मचारियों के लिए न तो दफ्तर है और न ही आवास। यहां काम करने वाले कर्मचारी कंट्रोल रूम के केबिन में रहकर रात काटने को मजबूर है। वर्ष 1975 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा ने उपकेंद्र की नींव रखी थी। इसके बाद से किसी ने उपकेंद्र की बदहाली की तरफ ध्यान नहीं दिया।
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सरायअकिल पावर हाउस का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। यहां पर एसडीओ, जेई व 22 संविदा कर्मियों के लिए बैठने तक की जगह नहीं है। उपकेंद्र से क्षेत्र के 50 गांवों को आपूर्ति की जाती है। हालात यह है कि यहां रात के वक्त बिजली विभाग का कोई जिम्मेदार नहीं रुकता। सारा उपकेंद्र संविदा कर्मियों के भरोसे रहता है। ठंड के इस मौसम में मजबूरन यहां रात को ड्यूटी करने वाले स्टॉफ को या तो कंट्रोल रूम में सोना पड़ता है या फिर अलाव ताप कर रात गुजारनी पड़ रही है। कंट्रोल रूम में स्टाफ होने के कारण हादसे का अंदेशा बना रहता है। पावर हाउस में बाउंड्रीवॉल भी नहीं बनाई गई। जिसकी वजह से यहां अराजकतत्व अक्सर आ जाते हैं।
इनका कहना है
विद्युत उपकेंद्र में बना भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है और बाउंड्रीवाल भी नही है। सरकारी काम के लिए यहां बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों की समस्या के बाबत कई बार अफसरों को पत्र लिखा जा चुका है। इसके बाद भी कोई समस्या की तरफ ध्यान नहीं दे रहा।
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अतुल श्रीवास्तव, अवर अभियंता सराय अकिल
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