तहसील क्षेत्र के ब्लॉकों में मनरेगा मजदूरों को 100 दिन रोजगार देने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। काम नहीं मिलने से मजदूरों के परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रधान के घर का चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं दिया जा रहा है। यही हाल प्रवासी मजदूरों का है। सभी अब मनरेगा छोड़कर दूसरे काम की तलाश में हैं।
चायल तहसील के तीनों ब्लॉक चायल, नेवादा और मूरतगंज के अधिकतर गांवों में इस समय मनरेगा योजना ठप है। नेवादा ब्लॉक के 74 ग्राम सभाओं में से दो दर्जन से अधिक गांव के मजदूर योजना से वंचित है। शाहपुर पेरवा, दरियापुर, रामपुर, बलहेपुर, नूरपुर, पुरखास, कोटिया, सेवढ़ा आदि गांवों में योजना पूरी तरह से ठप है।
यही हाल चायल विकास खंड के नीबी शाना, मीरपुर, चकबादशाहपुर, जलालपुर शाना, चौराडीह और फरीदपुर सुलेम का है। मूरतगंज विकास खंड के बलकरनपुर, उजिहिनी खालसा, हुसेनमई, उमरछा, समसपुर, कूरई आदि गांवों में मजदूरों का काम पूरी तरह से बंद है।
गांव में मनरेगा से चकरोड, भूमि का समतलीकरण, तालाब का बंधा निर्माण सहित अन्य कार्य नहीं होने से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। रोजगार के अभाव में मजदूरों का परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। नेवादा ब्लॉक के दरियापुर ग्राम पंचायत के मजदूरों ने बुधवार को ब्लॉक पहुंच कर अपनी पीड़ा बताई।
मजदूरों का कहना था कि काम नहीं मिलने से उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। मजदूर काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। प्रधान व सचिव उन्हें रोजगार नहीं मुहैया करा रहे हैं।
नेवादा में अब तक मात्र ढाई सौ मजदूरों को ही मिला काम
पंचायत चुनाव के बाद से अब तक नेवादा विकास खंड में मात्र ढाई सौ मजदूरों को ही काम मिला है। सचिव और ग्राम प्रधानों का कहना है कि बरसात अधिक होने के कारण काम बंद चल रहे हैं। यही हाल चायल और मूरतगंज ब्लॉक का है। ब्लॉकों में कोरोना महामारी के चलते घर लौटे प्रवासी मनरेगा में मजदूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मनरेगा में मजदूरी करने वालों का आंकड़ा चायल में सिर्फ 170 मजदूरों का दिखाया गया है, जबकि मूरतगंज में 320 लोगों ने काम किया है।
समूह की महिलाओं को भी नहीं मिल रहा लाभ
मनरेगा में मजदूरी के लिए समूह की महिलाओं को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। लेकिन शासन की यह मंशा भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। समूह और उनकी नामित महिलाओं को मनरेगा योजना से लाभ नहीं मिल पा रहा है।