फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ललही छठ: पुत्रों की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा व्रत

Sun, 29 Aug 2021 05:32 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

मंझनपुर, करारी, अजुहा, भरवारी, सरायअकिल, पश्चिम शरीरा सहित विभिन्न कस्बों तथा गांव-गांव में ललही छठ पर महिलाओं ने व्रत रखा। सुबह महिलाओं ने स्नान के बाद नए वस्त्र व आभूषण धारण कर पूजा की तैयारी की।
विज्ञापन
Lalhi Chhath: Mothers keep fast for the longevity of their sons - फोटो : KAUSHAMBI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिले में ललही छठ का पर्व शनिवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने दिन भर उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा की। पुत्रों की दीर्घायु के लिए मां भगवती से प्रार्थना की गई। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्टी को ललही छठ के नाम से जाना जाता है। इसे हल षष्ठि भी कहते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। तभी से यह त्योहार मनाया जाता है। इस बार शनिवार को यह त्योहार मनाया गया।
विज्ञापन


मंझनपुर, करारी, अजुहा, भरवारी, सरायअकिल, पश्चिम शरीरा सहित विभिन्न कस्बों तथा गांव-गांव में ललही छठ पर महिलाओं ने व्रत रखा। सुबह महिलाओं ने स्नान के बाद नए वस्त्र व आभूषण धारण कर पूजा की तैयारी की। प्रमुख स्थानों पर गड्ढा खोदा गया। गड्ढे के बगल में पलाश, कुश, बैर की झाड़, छियूल, गूलर की डाली गाड़कर गौरी गणेश की पूजा की गई। पूजन में सात प्रकार की भूमि दाने को मिट्टी व चीनी के कुढ़वे में भरकर रखा गया था। पूजन के बाद कथा सुनी गई। अंत में पुत्रों की दीर्घायु के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। माताओं ने अपने-अपने बेटों का चेहरा आंचल से पोछ कर पूजन की समाप्ति की।

संतान के चिरंजीवी होने के लिए माताओं ने की छठ पूजा
पुत्रों की दीर्घायु की कामना लेकर माताओं ने रखकर छठ मैया की पूजा-अर्चना की। इस दौरान संतानों को रोग दोष से मुक्ति देकर चिरंजीवी होने का आशीष मांगा गया।
विज्ञापन

शनिवार को भद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि होने पर ललही छठ मनाई गई। माताओं ने सुबह स्नान ध्यान करने के बाद निर्जला व्रत रखा और दोपहर के समय मिष्ठान, फूल, चावल, मेवा चीनी व मिट्टी से बने कूल्हडो में भूना अनाज भरकर पूजा अर्चना की। माताओं ने पुत्रों के दीर्घायु प्रदान करने की कामना की। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस दिन भगवान श्री कृष्ण की दूसरी माता रोहिणी के गर्भ से बलभद्र जी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन माताएं व्रत रखकर छठ महारानी की पूजा करती हैं।

जिससे उनके बच्चों को दीर्घायु प्राप्त होती है। गुरुकुल विद्यालय के आचार्य अशर्फीलाल शास्त्री बताते हैं इस दिन व्रती महिलाएं सूर्य देवता को अर्ध्य देकर उनकी पूजा करती हैं। क्योंकि भगवान सूर्य साक्षात देवता हैं, जिनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इनकी आराधना से शरीर के भीतर के सारे संताप खत्म होते हैं। इस दिन सूर्य की पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर प्रसन्न किया जाता है। जिसके बाद वे माताओं को उनके पुत्रों को रोग दोष संताप से बचाकर चिरंजीवी होने का वरदान देती हैं।

चौराडीह में लगा हलछठ मेला, रही रौनक
तहसील के चौराडीह गांव में हलछठ पर्व को लेकर पारंपरिक मेला शनिवार को धूमधाम से आयोजित हुआ। इसमें लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इससे मेले में रौनक रही।
क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि पिछले साल कोविड- 19 के चलते मेले को स्थगित कर दिया गया था। लेकिन इस बार बाजार में धूमधाम से मेला लगाया गया। मेले में आयोजित होने वाली इनामी कुश्ती और लाउडस्पीकर सहित अधिक भीड़ जुटाने वाले कार्यक्रमों को हटाकर मेला लगाया गया। खिलौने और खाने पीने, गृहस्थी सामग्री की दुकानें सजी रही। मेला कमेटी के अध्यक्ष पूर्व प्रधान जितेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि दशकों से चल रही पारंपरिक मेले में इनामी कुश्ती का आयोजन भी किया जाता है। जिसमें गैर राज्यों और जनपदों से आने वाले पहलवान भाग लेते थे। कोरोना महामारी को देखते हुए कुश्ती, लाउडस्पीकर, आदि किसी भी प्रकार का अधिक भीड़ जुटाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया है । शनिवार को लगे मेले में बच्चों ने खिलौने तो वयस्कों ने अपने जरूरत की वस्तुएं खरीदी।

Lalhi Chhath: Mothers keep fast for the longevity of their sons- फोटो : KAUSHAMBI

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें