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कौशाम्बी : राजकीय सम्मान के साथ वीर सपूत को दी गई अंतिम विदाई, गांव में हुआ अंतिम संस्कार

Wed, 25 Aug 2021 11:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

आठ महीने पहले गोली लगने से नरेंद्र जख्मी हुए थे। उनका इलाज महराष्ट्र के पुणे स्थित न्यू कमांड अस्पताल में चल रहा था। सोमवार को इलाज के दौरान नरेंद्र ने अंतिम सांस ली थी। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर घर लाया गया तो कोहराम मच गया।
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Prayagraj News : शहीद नरेंद्र को अंतिम सलामी देते सैनिक। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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महाराष्ट्र के तेलांगाना में माओवादियों की गोली के शिकार सिराथू तहसील के रामसहायपुर गांव निवासी नरेंद्र कुमार दिवाकर का बुधवार को उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आठ महीने पहले गोली लगने से नरेंद्र जख्मी हुए थे। उनका इलाज महराष्ट्र के पुणे स्थित न्यू कमांड अस्पताल में चल रहा था। सोमवार को इलाज के दौरान नरेंद्र ने अंतिम सांस ली थी। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर घर लाया गया तो कोहराम मच गया।

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बुधवार को शहीद नरेंद्र के पैतृक गांव में जिलाधिकारी सुजीत कुमार, एसपी राधेश्याम, सिराथू विधायक शीतला प्रसाद, सदर विधायक लालबहादुर, एसडीएम सिराथू प्रखर उत्तम, सीओ योगेंद्र कृष्ण नारायण सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जितेंद्र सोनकर, कड़ा ब्लॉक प्रमुख अनुज सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव , वरिष्ठ सपा नेता आनंद मोहन सिंह पटेल , पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार, चेयरमैन सिराथू राजेंद्र कुमार उर्फ भोला यादव, टिंकू तिवारी, किसान नेता बलबीर सिंह चौहान, मुन्ना फौजी सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग पहुंचे। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ शहीद नरेंद्र के बड़े भाई राकेश ने नम आंखों ने चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान भीड़ में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम रहीं।

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Prayagraj News : शहीद नरेंद्र कुमार (फाइल फोटो)। - फोटो : प्रयागराज
शहीद पति से लिपटकर रोई दीपा
शहीद नरेंद्र का शव सेना के जवान सुबह जैसे गांव लेकर पहुंचे उसकी पत्नी दीपा बदहवाश हो गई। नरेंद्र की मां सुदामा का भी यही हाल था। सास-बहू का रोना देख मोहल्ले व रिश्तेदारी की महिलाएं उन्हें चुप कराने का प्रयास तो कर रहीं थीं, लेकिन अपनी आंखों के पीछे छिपे आंसुओं के  सैलाब को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही थीं।

बेटियों को उपहार लाने की बात कहकर गए थे नरेंद्र, आया शव
पइंसा। माओवादियों के हमले में शहीद नरेंद्र की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी वैशाली (7), दूसरी आयरा (5) और सबसे छोटी गुड़िया (2) साल की है। नरेंद्र जब भी ड्यूटी पर जाते थे तो बेटियों से उनकी पसंद के सामानों की लिस्ट तैयार कराते थे। पिछली बार भी वह बेटियों से सामान की सूची बनवा कर ले गए थे, लेकिन बद किस्मती से उपहार नहीं आया और शव आ गया।

पिता से प्रेरणा लेकर फौज में भर्ती हुए थे नरेंद्र
रामसहायपुर निवासी शहीद नरेंद्र दिवाकर के आदर्श उनके पिता लल्लू राम थे। लल्लू राम बहराइच के नानपारा में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। उस दौरान जेशमल सतराना खालिस्तान कमांडो के चीफ को उन्होंने मार गिराया था। उस समय आतंकवादी पर पंजाब सरकार और 15 लाख एवं हरियाणा व यूपी सरकार ने पांच-पांच लाख का इनाम घोषित किया था। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा के साथ उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। साथ ही क्षेत्राधिकारी के पद पर प्रोन्नति किया गया। लगभग सात वर्ष पहले लल्लूराम कानपुर से सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पिता से प्रेरणा लेते हुए बेटे नरेंद्र सेना में भर्ती हुए व नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त हुए।

शहीद के गांव में बनेगा स्मृति द्वार, परिवार को मिलेगा पट्टा
पइंसा। शहीद नरेंद्र के अंतिम संस्कार में पहुंचे सिराथू विधायक शीतला प्रसाद उर्फ पप्पू पटेल ने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं हैं। देश के प्रति दी गई उनकी शहादत हर भारतीय के दिलों में बसती है। शहीद नरेंद्र की याद में रामसहायपुर गांव में स्मृति द्वार बनवाया जाएगा। इसके अलावा शदीद के परिवार को एक बीघे कृषि योग्य भूमि का पट्टा आवंटित कराया जाएगा। 

शहीद की अंतिम झलक पाने को पेड़ पर चढे रहे लोग
शहीद नरेंद्र की अंतिम झलक पाने के लिए गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर गली में सन्नाटा था। गलियां में थीं तो सिर्फ गाड़ियां। अंत्येष्टि स्थल पर भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि लोग आसपास पेड़ों में चढ़ कर शहीद के अंतिम दर्शन को बेताब दिखे।
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