यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अपीलार्थी मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश की ओर से निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सश्रम आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के सजायाफ्ता दो बंदियों की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। अभियुक्त को रिहाई के बाद छह माह में एक लाख आठ हजार रुपये लगे अर्थदंड में से 25 हजार जमा करने होंगे। शेष राशि पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अपीलार्थी मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश की ओर से निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सश्रम आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।
मामला कौशाम्बी जिले के थाना पिपरी का है। वर्ष 2018 में छह वर्षीय बच्ची के पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई कि उसकी बेटी खेलते समय गुम हो गई है। दूसरे दिन बच्ची की लाश नर्सरी में बरामद हुई तो पिता ने गांव के ही मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश के विरुद्ध बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि अभियुक्तों को राजनीतिक रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को जंगली जानवरों ने खाया था और प्राइवेट पार्ट पर जो मानव वीर्य मिला, डीएनए टेस्ट में वह आरोपियों से मैच नही हुआ है। याचीगण का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर सजा सुनाई गई है। आरेाप पूर्णत: साबित नहीं हैं। कोर्ट ने अभियुक्तों की जमानत सशर्त मंजूर करते हुए 6 सप्ताह में 25 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया है। जबकि जुर्माने की शेष राशि पर रोक लगा दी है।