पिपरी कोतवाली के औधन गांव में बुधवार सुबह घर के अंदर आंगन में वृद्धा का खून से लथपथ शव मिला। शव से कुछ दूरी पड़ी चारपाई में भी खून लगा था। घर में किसी तरह की लूट नहीं हुई है। घटना की जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस का मानना है कि किसी जंगली जानवर के हमले में वृद्धा की मौत हुई है। औधन गांव निवासी जगरुप पाल की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है। घर में उसकी पत्नी शिवकली (70) अकेले रहती थी। शिवकली के छह बेटे अलग-अलग गांवों में रहते हैं। उसका घर गांव के बाहर बना है। मंगलवार दोपहर से शिवकली नहीं दिखाई दी। उसके घर की तरफ से गांव का एक किशोर रोजाना कोचिंग पढ़ने जाता है। बुधवार सुबह उसने देखा की शिवकली की पालतू बिल्ली बाहर बैठी रो रही है। इस पर उसने शिवकली को आवाज दी लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। छात्र ने यह बात गांव जाकर लोगों को बताई। गांव में दूसरे घर में रहने वाले शिवकली का बेटे महेश पाल व रमेश पाल ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे और घर के दरवाजा में धक्का दिया तो वह खुल गया। अंदर से कुंडी नहीं लगी थी। आंगन में शिवकली का शव खून से लथपथ पड़ा था। जिस चारपाई पर शिवकली सोती थी उसमें पड़े बिस्तर व मच्छरदानी में खून लगा हुआ था। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस को बेटों ने बताया कि उसकी मां की अज्ञात लोगों ने हत्या की है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस का मानना है कि शिवकली की मौत किसी जंगली जानवर के हमले में हो सकती है। तर्क दिया गया कि शिवकली का घर गांव के बाहर है और उसने बिल्ली पाल रखी थी। बिल्ली का शिकार जंगली जानवर वन बिच्चुक करता है। माना जा रहा है कि बिल्ली पर जानवर ने हमला किया और उसे बचाने पहुंची शिवकली पर उसने हमला कर दिया। शिवकली के शरीर पर खरोंच के निशान भी मिले हैं। इस बारे में इंस्पेक्टर श्रवण कुमार सिंह का कहना है पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के सही कारण का पता चल सकेगा। परिवार के लोगों की तरफ से किसी तरह की तहरीर नहीं दी गई है।
खून से सना था बिस्तर, शव पड़ा था दो मीटर दूर
वृद्धा का शव आंगन में पड़ा था। बिस्तर से शव की दूरी करीब दो मीटर थी। बिस्तर व आंगन में पड़ा खून सूख चुका था। इससे अनुमान लगाया गया कि शिवकली की मौत मंगलवार दिन या शाम को हुई होगी। इसी वजह से घर में अंदर से कुंडी नहीं बंद थी।
मृतका के नाम कई गांवों में है अचल संपत्ति
मृतका शिवकली देवी के पति को विरासत में काफी जमीन मिली थी। औधन सहित कथगांव, चरवा के चरई आदि गांव में कई बीघे जमीन उसके नाम दर्ज है। बेटे ही सभी जमीनों को देखभाल करते हैं। दो वर्ष पहले पति जगरूप की मौत होने के बाद मृतका और उसके छह बेटे जमीन के मालिक हो गए। मृतका के दो बेटे रमेश पाल और महेश पाल गांव में ही अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं। जबकि चार अन्य बेटे सुरेश पाल, दिनेश पाल, सुरेंद्र और लाल बहादुर अलग-अलग गांव में रहते हैं। बड़े बेटे सुरेश ने बताया कि वह अपनी ससुराल चरवा के अरई गांव में परिवार के साथ रहता है जबकि दिनेश काठगांव में, सुरेंद्र और लाल बहादुर चरवा के चरई गांव में रहते हैं।