मंझनपुर। जिला पंचायत (जिपं) के पूर्व अपर मुख्य अधिकारी वीरेंद्र बहादुर समेत तीन लोगों के खिलाफ सदर कोतवाली पुलिस ने जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई राज्य मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर की है।
सरायअकिल कस्बे के बुद्धपुरी मोहल्ला निवासी अशोक कुमार सेन का कहना है वह आरटीआई कार्यकर्ता हैं। वर्ष 2005 से लेकर 2009 तक जिला पंचायत में की गई तमाम नियुक्तियों के बाबत उसने जन सूचना अधिकार से जानकारी मांगी थी। सूचना नहीं मिलने पर उसने राज्य सूचना आयोग में शिकायत की। इसी को लेकर तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी वीरेंद्र बहादुर ने तीन दिसंबर 2003 को वार्ता के लिए फोन करके उसे दफ्तर बुलाया था।
अशोक का कहना है कि वार्ता के दौरान वहां जिला पंचायत के वरिष्ठ लिपिक शैलेंद्र भारतीय व सुरक्षाकर्मी विवेक यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने अभद्रता करते हुए उसका मोबाइल छीन लिया। फर्जी मुकदमे में फंसाने की भी धमकी दी गई। बाद में किसी तरह उसका फोन वापस किया गया था। मामले की शिकायत अशोक ने पुलिस से की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उसने कार्रवाई के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा। आयोग के निर्देश पर मंगलवार को पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।