कासगंज में 24 घंटे में दीवार गिरने की दो बड़ी घटनाएं हुईं। रविवार की सुबह दीवार गिरने से मलबे में दबकर तीन लोगों की मौत हो गई। रविवार की शाम दीवार गिरने से तीन लोग दब गए। वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को आनन फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना सौबत भूड़ गांव की है। गांव निवासी विशुन सिंह के घर के सामने घेर बना है। घेर में मवेशी बंधे थे। मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए उन्होंने अलाव जलाया। कुछ देर के लिए वह अलाव के समीप बैठ गए। उनके पास उनकी चाची भूदेवी भी बैठ गईं। उनकी पत्नी स्नेहलता पास में ही साफ-सफाई का काम कर रही थी।
इसी बीच अचानक घेर की दीवार भर भराकर गिर गई। मलबे में तीनों लोग दब गए। दीवार गिरते ही मलबे दबे लोगों के चीख निकल गई। चीख पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके की तरफ भागे। सभी ने मिलकर तीनों को मलबे से निकाला। इसके बाद घायलों को लेकर अस्पताल पहुंचाया। यहां गंभीर हालत में उनकी इलाज चल रहा है।
ज्ञात हो कि इससे पहले रविवार की सुबह दीवार गिरने की एक अन्य घटना घटित हुई। घटना पटियाली थाना क्षेत्र के नीवलपुर गांव की है। गांव निवासी जोगराज सिंह के घर का निर्माण कार्य चल रहा है। चार दिन पहले ही एक नई दीवार खड़ी की गई थी। रविवार की सुबह उसके पड़ोस के घर में एक नई दीवार बनाने की नींव खोदी जा रही थी। नींव खोदने का काम रामलड़ैते पुत्र नैनसुख, योगेंद्र यादव पुत्र रामलड़ैते, संगीता उर्फ स्नेहलता पुत्री रामलड़ैते, कपूरी पुत्री रामलड़ैते कर रहा थे।
इसी समय यह दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। हादसे में नींव की खोदाई कर रहे चारो लोग दब गए। हादसे के बाद घर में चीख पुकार मच गई। शोर सुनकर मौके पर ग्रामीणों का जमावड़ा हो गया। ग्रामीणों ने आनन-फानन में मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला और फर्रुखाबाद के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हादसे में संगीता, योगेंद्र, कपूरी की मौत हो गई। सोमवार की सुबह तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।