फोटो19मोहनपुरा में स्प्रिंकल पद्वाति से मटर की फसल की होती सिंचाई । संवाद
कासगंज। फसलों में पारंपरिक सिंचाई के बजाय आधुनिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाकर किसान समय और पानी दोनों की बचत कर रहे हैं। कस्बा मोहनपुरा क्षेत्र के कांतौर, रामपुर, अफजलपुर आदि गांवों में किसान मटर, गेहूं, आलू आदि फसलों में स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचाई कर रहे हैं। इस आधुनिक सिंचाई पद्धति से 30 से 50 प्रतिशत पानी और शारीरिक श्रम की बचत होती है। यह खेत में एक समान और हल्की सिंचाई के लिए बेहद कारगर है। बेहतर फसल उपज में सहायक है। असमतल और ऊबड़-खाबड़ खेत में भी काफी कारगर है। मिट्टी के कटाव को भी रोकती है।
पाला नियंत्रण में है बेहद कारगर
स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई सर्दियों में पाला नियंत्रण के लिए अत्यधिक कारगर विधि है। सर्दी में पड़ने वाले पाले से फसल के बचाव के लिए हल्की बौछारी सिंचाई की जरूरत होती है। क्योंकि नमी की अधिकता के कारण खेतों में पानी की अपेक्षाकृत कम जरूरत होती है। ऐसे में बौछार से पड़ी पानी की बूंदें पौधे की पत्तियां से पाला हटाने का काम करती हैं।
जिला उद्यान अधिकारी रवि चंद्र जयसवार ने बताया कि ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर के लिए 2 हेक्टेयर तक के लघु सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत और 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि के सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। वहीं पोर्टेबल एवं रेनगन स्प्रिंकलर के लिए 2 हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों को 75 प्रतिशत और इससे अधिक जमीन वाले किसानों को 65 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध होगा। आवेदन के लिए किसान के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि की खतौनी, दो फोटो, पानी के साधन की उपलब्धता एवं योजना का सात वर्ष तक उपयोग करने का सहमति पत्र के दस्तावेज की आवश्यकता होती है। इस योजना से अधिकतम 5 हेक्टेयर तक किसान लाभ ले सकते हैं। आवेदन के पश्चात निदेशालय से स्वीकृति मिलने पर त्रिपक्षीय समझौता देना अनिवार्य है। सारी प्रक्रिया और थर्ड पार्टी निरीक्षण होने के बाद सब्सिडी हस्तांतरित हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए किसान उद्यान विभाग में संपर्क कर सकते हैं।