उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दिमागी टीबी रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका बैक्टीरिया फेफड़ों को प्रभावित करने तक ही सीमित नहीं रह गया है। महिलाओं के गर्भाशय की टीबी के बाद अब दिमागी टीबी के मामले भी सामने आने लगे हैं। जिले में वर्ष 2018 में दिमागी टीबी का पहला मामला सामने आया। इसके बाद ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
कब होती है दिमाग में टीबी होने की संभावना
चिकित्सक बताते हैं कि टीबी रोग सिर्फ फेफड़ों में होने वाली बीमारी नहीं है। यह बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। इनमें से ही एक दिमाग़ की टीबी भी है। इसमें टीबी के बैक्टीरिया सीधा दिमाग पर हमला करते हैं। दिमाग की टीबी एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से नहीं फैलती। जब फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता है तो उसके मुंह से निकली बूंदे दूसरे व्यक्ति के अंदर प्रवेश कर जाती हैं। यह बूंदे यदि दिमाग में प्रवेश कर जाती हैं तो व्यक्ति के दिमाग में टीबी होने की संभावना होती है। दिमाग की झिल्लियों में सूजन या गांठ पड़ जाती है
टीबी
केस-1
शहर की एक किशोरी को लगातार बुखार की शिकायत रहने लगी। दवा खाने पर भी उसका बुखार नहीं उतरता। अचानक किशोरी को दौरा पड़ा और वह बेहोश हो गई। डॉक्टर को दिखाने पर भी उसे होश नहीं आया। उसे डॉक्टरों ने अलीगढ़ रेफर कर दिया। एमआरआई की रिपोर्ट में दिमाग में सूजन व छोटी-छोटी गांठे पाई गईं। उपचार के बाद भी आराम नहीं मिला। इस पर उसे दिल्ली के लिए रेफर किया गया। चिकित्सकों ने उसे दिमाग की टीबी बताई। एक माह से जिला अस्पताल में उसका टीबी का उपचार चल रहा है।
केस 2
गंजडुंडवारा के एक युवक को अक्सर दौरा पड़ने की शिकायत रहती थी। युवक कई-कई दिनों तक बेहोश रहता। चिकित्सक को दिखाने पर भी उसको फायदा नहीं मिलता। इस पर परिजन उसे दिल्ली ले गए। यहां उसका सीटी स्कैन किया गया। इसमें दिमाग में सूजन व गांठे पाई गईं। रिपोर्ट देखकर चिकित्सक ने उसे दिमागी टीबी बताई। इसके बाद उसे जिला अस्पताल पर टीबी का इलाज करने के लिए भेज दिया। अब उसका जिला अस्पताल पर टीबी का इलाज चल रहा है।
कासगंज में टीबी
फैक्ट फाइल-
| वर्ष |
मरीजों की संख्या |
| 2018 |
1 |
| 2019 |
1 |
| 2020 |
0 |
| 2021 |
0 |
| 2022 |
3 |
| 2023 |
5 |
दिमागी टीबी के लक्षण-
- बेहोशी
- चक्कर आना
- लगातार सिर दर्द रहना
- थकान कमजोरी महसूस होना
- हल्का फीवर रहना
- उल्टी होना
- बीमारी बढ़ने पर गर्दन में अकड़न
- उलझन महसूस होना
- अधिक गुस्सा करना
बरतें यह सावधानी-
- मोबाइल का अधिक देर तक प्रयोग न करें
- लगातार टीवी न देखें
- बात-बात पर तनाव न लें
दिमागी टीबी के लक्षण
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अतुल सारस्वत ने बताया कि दिमागी टीबी लाइलाज बीमारी नहीं हैं। समय से जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। ऐसे मरीज का डेढ़ से दो वर्ष तक नियमित इलाज होता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति व बच्चों में विकसित हो जाती है। जैसे ही मरीज को दिमागी टीबी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। दिमागी टीबी का पता एक्सरे, एमआरआई, सिटी स्कैन, सीबी नेट और सीएसए जांच से लगाया जा सकता है।