हर कांवड़ियों की टोली में एक डीजे वाहन चल रहा था। सभी शिवभक्ति की राह में डूबे नजर आ रहे थे। लहरा, कछला गंगाघाटों पर भीड़ का आलम इस कदर था कि दूर-दूर तक सिर ही नजर आ रहे थे। हर कांवड़िया शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति में नजर आ रहा था। हर जुबां पर भोले की जय-जयकार थी।
भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में शिवभक्ति श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोल रही है। शिव की आस्था में डूबे कांवड़ियों के 24 घंटे में पांच लाख कांवड़ उठाने का अनुमान है। यह श्रावण मास का रिकॉर्ड है। रविवार को गंगाघाट पर भीड़ का आलम था क्योंकि जिन कांवड़ियों को सोमवार को अभिषेक करना था वह तो जल लेने पहुंचे ही वहीं मंगलवार को शिवतेरस होने के कारण कांवड़ियों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। ऐसी स्थिति में लहरा गंगाघाट से नदरई तिराहे तक कांवड़ियों की भीड़ का आलम बना रहा।
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भोले की आस्था में डूबे श्रद्धालु नाचते-गाते कांवड़ भरने जा रहे थे और कांवड़ भरकर आ रहे थे। रविवार की पूरी रात कांवड़ें चलती रहीं, वहीं सोमवार को पूरे दिन कांवड़ियों की टोलियां भोले की जय-जयकार करते हुए निकलती रहीं। राजस्थान, मध्यप्रदेश, सहित गृह राज्य के कांवड़िये कांवड़ भरकर ले जा रहे थे। हर कांवड़ियों की टोली में एक डीजे वाहन चल रहा था। सभी शिवभक्ति की राह में डूबे नजर आ रहे थे। लहरा, कछला गंगाघाटों पर भीड़ का आलम था।
गंगा घाट पर कांवड़ियों की भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के बीच कांवड़िये रात में ही गंगास्नान कर रहे थे और कांवड़ें भर रहे थे लेकिन हर कांवड़िया शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति में नजर आ रहा था। हर जुबां पर भोले की जय-जयकार थी। सीओ सदर आंचल चौहान का मानना है कि कम से कम पांच लाख कांवड़िये पिछले 24 घंटे में कांवड़ भरकर ले गए। कांवड़ मेला शांति और सद्भाव के साथ चल रहा है।
शिव भक्ति में डूबा मासूम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पांच साल के शुभ ने उठाई कांवड़
श्रावण मास में भगवान शिव के प्रति आस्था और भक्ति का अनोखा नजारा कस्बे में देखने को मिला। कस्बा के मोहल्ला मोरी निवासी विवेक वार्ष्णेय का पांच वर्षीय बेटा शुभ वार्ष्णेय कांवड़ लेकर कछला धाम के लिए रवाना हुआ। नन्हे बालक को कांवड़ लेकर जाते देख रास्ते में लोगों की नजरें उस पर टिक गईं। शुभ वार्ष्णेय के कंधे पर कांवड़ देखकर आसपास मौजूद लोग काफी उत्साहित नजर आए। परिजन के अनुसार शुभ भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना चाहता था।
कांवड़ लेकर जाते शिवभक्त।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आस्था ने दिया हौसला, अकेले चढ़ाई डाक कांवड़
कस्बे के समीपवर्ती गांव नगरिया ताड़ निवासी अंजली पुत्री कृष्णपाल सिंह पर आस्था का ऐसा जुनून छाया कि वह अकेले सोरोंजी से डाक कांवड़ लेकर गांव के मंदिर में भोलेनाथ का अभिषेक किया। बीएससी नर्सिंग की छात्रा 21 वर्षीय अंजली ने बताया कि अचानक मन में कांवड़ लाने का विचार आया और सोमवार सुबह ही करीब 9 बजे गांव से अकेले सोरोंजी चली गई। बिना किसी सहायता के अकेले वहां से डाक कांवड़ लेकर आई और गांव में ही जल अभिषेक किया। वैसे डाक कांवड़ एक समूह में लाई जाती है लेकिन अंजली अकेले ही लाई।
सड़क पर कांवड़ियों की भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाम खुलवाने में पुलिस की छूटे पसीने, शव वाहन भी नहीं पहुंच पाए कछला गंगाघाट
आस्था के जाम ने अपनों का अंतिम संस्कार करने वालों के लिए समस्या खड़ी कर दी। कांवड़ भरने के लिए शिवभक्तों की टोलियां तीर्थनगरी एवं कछला गंगाघाट के लिए लगातार पहुंच रहीं थीं। कासगंज-बरेली मार्ग से सोरोंजी तिराहे पर श्रद्धालु कांवड़ियों के वाहन फंस गए। तीर्थनगरी के ब्लॉक से पॉलीटेक्निक कॉलेज तक मार्ग पर कई घंटे तक श्रद्धालु फंसे रहे। जाम के कारण शव वाहन भी कछला की ओर नहीं जा पाए। दूसरे श्मशान घाटों पर दिवंगत लोगों की अंत्येष्टि करनी पड़ी। कांवड़ मेले पर प्रशासन ने सुगम यातायात बनाए रखने के लिए आने-जाने वाले कांवड़ियों के लिए राजमार्ग की अलग-अलग लेन निर्धारित की हैं। यात्री वाहनों का रूट डायवर्जन भी किया है लेकिन कांवड़ियों की रिकॉर्ड भीड़ के आगे सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। जाम को खुलवाने में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के पसीने छूटते रहे। रात के समय कई घंटे तक जाम लगा रहा। श्रद्धालु कांवड़ियों में उपमार्गों से निकलने की होड़ थी, जिससे उपमार्ग भी जाम की चपेट में आ गए। जाम में मरीजों को ले जाती एंबुलेंस भी फंसी रहीं।
कांवड़ियों की भीड़ से लगा जाम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरे स्थानों पर किया अंतिम संस्कार
शहर के भूपेंद्र झंवर का निधन रविवार को दिल्ली में हो गया। उनके शव को कछला गंगाघाट तक ले जाने की तैयारी थी लेकिन शव वाहन चालक ने जाम के कारण कछला की ओर वाहन ले जाने से इन्कार कर दिया। उनके पुत्र सुबोध ने बताया कि अन्य वाहनों के लिए भी प्रयास किए गए लेकिन कोई तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में काली नदी के श्मशान घाट पर देर रात अंत्येष्टि करनी पड़ी। वहीं चित्रगुप्त कॉलोनी निवासी भगवती प्रसाद का सोमवार सुबह निधन हो गया। जाम और कांवड़ियों की भीड़ के कारण भगवती प्रसाद का शव भी अंत्येष्टि के लिए कछला नहीं जा सका। उनके पुत्र राजेश ने बताया कि पैतृक गांव अहरौली में ले जाकर उनका अंतिम संस्कार किया गया।