कानपुर में जीका वायरस अभी न तो जान ले रहा है और न ही गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं को नुकसान पहुंचा रहा है। ये संकेत जीका वायरस पर हो रहे सर्वे से मिल रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस कभी भी म्यूटेशन से अपना रूप बदलकर खतरनाक हो सकता है।
इसी आशंका को लेकर महामारी विशेषज्ञ इसके अध्ययन में जुटे हैं। इसके साथ ही मच्छरों के पेट से मिल रहे जीका वायरस के सीरियल का अध्ययन किया जा रहा है। दिल्ली और लखनऊ से आए महामारी विशेषज्ञ कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखकर अध्ययन कर रहे हैं। जीका की ताजा स्थिति भी चौंका रही है।
यह वायरस अभी सादा और सरल बना हुआ है। रोगियों में किसी प्रकार की जटिलता नहीं है। जबकि अफ्रीका में इस वायरस का रूप इससे उलटा है। अफ्रीकी देशों में इससे जटिलताएं भी हो रही हैं और गर्भस्थ शिशु को नुकसान भी। विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि अफ्रीका और एशियाई देशों में जीका का स्ट्रेन अलग-अलग है।
अंदेशा है कि अगर जीका वायरस म्यूटेशन से आक्रामक हुआ तो दिक्कतें पैदा कर सकता है। उस स्थिति में इसके लक्षण कैसे होंगे? यह भी आकलन किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि उसके पहले से इंतजाम कर लिए जाएं। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. वीबी सिंह का कहना है कि पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
अभी तक कोई मौत और गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। उसके साथ ही जनता को जागरूक किया जा रहा है कि बचाव के साधन अपनाएं और एडीज एजिप्टाई के ब्रीडिंग स्थल न पनपने दें।