पुलिसवालों ने मेरे बेकसूर भाई को मुझसे छीन लिया....। मेरा भाई बूढ़े पिता के जीने का इकलौता सहारा था। पुलिस वाले अगर एक बार घर पर बात कर लेते तो शायद भाई जिंदा होता...। ये आरोप मंगलवार को आगरा निवासी मनीष की बहन शिवानी ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत के दौरान लगाया।
उनका कहना है कि मेरे भाई के हत्यारोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। बर्रा तीन निवासी मनीष गुप्ता उर्फ हेमो लखनऊ की रियल इस्टेट कंपनी में काम करते थे। पिता नंद किशोर गुप्ता घर में ही सिलाई का काम करते हैं। मनीष पत्नी मिनाक्षी और चार वर्षीय बेटे अभिराज और पिता के साथ रहते थे। उनकी दो शादीशुदा बहनें शिवानी और निशा उर्फ डॉली है।
पूरे घर का था भार, अपराध से दूर-दूर तक नहीं था नाता
शिवानी ने बताया कि तीन साल पहले उनकी मां उमा की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। तब से बुजुर्ग पिता अकेले हो गए थे। मनीष आगरा में नौकरी करते थे। पिता के कारण कानपुर लौट आए थे। डेढ़ माह पहले ही वह लखनऊ की एक कंपनी से जुड़े थे। उसी के सिलसिले में वह गोरखपुर गए थे। मनीष के पड़ोसियों ने बताया की वह मिलनसार और शांत व्यक्तित्व के थे। उनका अपराध से दूर-दूर तक नाता नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। मिनाक्षी एक मॉल में काम करती थी। पिछले साल ही मनीष ने छोटी बहन निशा की शादी एक इंजीनियर से कराई थी। मोहल्ले के कई लोग मनीष के घर ढांढस बांधने पहुंचे लेकिन यहां ताला लगा था।