आजादी के बाद पहली बार इस वर्ष ऐसा होगा कि खादी पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली छूट का कोई फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा। ऐसा प्रदेश सरकार की नई पॉलिसी की वजह से हो रहा है।
दरअसल, प्रदेश सरकार के नए नियमों के अनुसार खादी भंडारों के स्टॉक पर अब कोई छूट नहीं मिलेगी। जबकि नए उत्पादन पर 15 प्रतिशत छूट रहेगी। इस 15 प्रतिशत में भी पांच प्रतिशत बुनकरों को, पांच प्रतिशत संस्था को (विभिन्न मद के खर्च के लिए) और महज पांच प्रतिशत का ही लाभ खरीदार को मिलेगा। चूंकि पहले ही खादी भंडारों में करोड़ों रुपये का स्टॉक मौजूद है लिहाजा इस वर्ष यह पांच प्रतिशत छूट का लाभ मिलना मुश्किल है। व्यवहारिक रूप से केवल केंद्र सरकार से मिलने वाली 15 प्रतिशत छूट का ही लाभ उन्हें मिल सकेगा। गांधी जयंती से छूट का लाभ मिलना शुरू हो जाता है।
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राज्य सरकार (खादी बोर्ड) ने खादी पर एमडीए (मार्केट डेवलपमेंट असेस्मेंट) पॉलिसी लागू कर दी है। जिसमें उत्पादन में तो 15 फीसदी छूट दी गई है, लेकिन खादी भंडारों में जो करोड़ों का स्टॉक रखा हुआ है उस पर कोई राहत नहीं दी है। जबकि केंद्र सरकार (केवीआईसी) ने जब एमडीए पॉलिसी लागू की थी तो स्टॉक में भी दस फीसदी छूट दी थी, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा नहीं किया।
गांधी जयंती पर खादी भंडारों में लगने वाली प्रदर्शनी की छूट लोगों को खरीदारी के लिए आकर्षित करती थी, लेकिन अब छूट घटने से लोगों की रुचि कम होगी। इसके पीछे वजह है कि गांधी जयंती पर लगने वाली प्रदर्शनी में खादी भंडारों में रखा हुआ स्टॉक ही बिक्री के लिए लगाया जा रहा है। पुराना स्टॉक खत्म होने पर ही नया लॉट आएगा। तब जाकर नई पॉलिसी का लाभ खादी भंडारों को मिल पाएगा। फिलहाल तो खादी की नई नीति से खादी भंडारों को बड़ा झटका लगा है। उधर, केंद्र सरकार से मिलने वाली 15 प्रतिशत छूट जस की तस बरकरार है। इसका फायदा खरीदारों को मिलेगा।
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स्टॉक पर राहत देने से विभाग पर करोड़ों का बोझ बढ़ जाता इसलिए कोई राहत नहीं दी गई है। अगर खादी भंडार सचालकों को कोई परेशानी आ रही तो मुझसे आकर मिलें, कोई हल निकालूंगा। खादी आश्रमों का कोई अहित नहीं होगा।
सत्यदेव पचौरी, खादी व ग्रामोद्योग मंत्री
नई पॉलिसी के मुताबिक स्टॉक में रखे हुए माल पर छूट नहीं मिल पाएगी। खादी बोर्ड ने यह पॉलिसी लागू की है।इसमें विभागीय अफसर कुछ नहीं कर सकते।
अभय त्रिपाठी, परिक्षेत्रीय अधिकारी खादी बोर्ड