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कानपुर: इस्नोफीलिया रोगियों की जान से खिलवाड़ कर रही पैथोलॉजी

Tue, 03 Sep 2019 05:08 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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कानपुर में सस्ती घटिया मशीनों से इस्नोफीलिया की गलत रिपोर्ट देकर पैथोलॉजी सेंटर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस चूक के चक्कर में रोगियों का गलत इलाज होता जा रहा है। डॉक्टर उनका सेप्टीसीमिया का इलाज करने लगते हैं और हजारों की एंटीबायोटिक खिला डालते हैं, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं।
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मशीन की जांच के बाद मैनुअल जांच न कराने से यह गलती हो रही है। इस्नोफीलिया का रोगी, जो मात्र 210 रुपये के इलाज में ठीक हो जाता है, वह इस गलती के कारण 40-80 हजार रुपये के झटके में आ जा रहा है और ठीक भी नहीं होता।

ऐसे होती है गलतफहमी
जब रोगी को इस्नोफीलिया होता है तो उसका टीएलसी काउंट भी बढ़ा हुआ आता है। सस्ती मशीन इस्नोफीलिया को पकड़ नहीं पाती। डॉक्टर गलतफहमी में बढ़े टीएलसी काउंट से भ्रमित होकर सेप्टीसीमिया समझ लेता है। एंटी बायोटिक शुरू कर देता है। इलाज से फायदा नहीं होता तो रोगियों को भर्ती कर गलत लाइन पर इलाज होता रहता है।
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रोगी पहचानने का यह है तरीका
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि रोगी का सांस फूलने, बुखार और सूखी खांसी आने के अलावा दूसरे लक्षण नहीं हैं तो उसका इस्नोफीलिया का इलाज करते हैं। अगर पैथोलॉजी मैनुअल जांच कर लें, तो मर्ज पकड़ में आ जाएगा। होता यह है कि मशीन से जो रिपोर्ट निकली उसी को बिना मैनुअल जांच किए दे देते हैं। इस्नोफीलिया की और भी जांचें हैं।

- पैथोलॉजी एनालाइजर की रिपोर्ट ही दे देती है। मैनुअल करने में मेहनत लगती है। मशीन से झट से हो जाता है। पैथोलॉजियों की एनालाइजर के साथ मैनुअल भी करना चाहिए। इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे कि रोगियों को दोनों तरह से जांच कर रिपोर्ट दें।
- डॉ. एके सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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केस-1
मंधना के रामप्रकाश (55) को सांस फूलने और सूखी खांसी आने की दिक्कत रही है। निजी पैथोलॉजी से उन्होंने ढाई सौ रुपये में सीबीसी की जांच कराई। इस्नोफीलिया तो छह फीसदी दिखाया गया, टीएलसी 30 हजार निकली। इस पर डॉक्टर ने हार्ड एंटी बायोटिक शुरू कर दी। इससे उनकी हालत और बिगड़ गई। उठना मुश्किल हो गया। बाद में उन्हें सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार को दिखाया, तो पांच दिन बाद सवा दो सौ की दवा से ठीक हो गए।

केस-2
स्वरूपनगर की अनुपमा (35) की आंतों में दिक्कत हो गई है। उनकी सीबीसी जांच में भी इस्नोफीलिया का प्रतिशत सात रहा है। टीएलसी 25 हजार निकली। उनका 10 दिन सेप्टीसीमिया का इलाज चला। एंटीबायोटिक के कारण प्रतिरोधक क्षमता घट गई। आंतों में दिक्कत है। इस्नोफीलिया का इलाज प्रतिदिन 10 रुपये की दवा से हुआ। अब ठीक हो गईं।  पांच-छह और रोगियों से बात की, सभी ने एक जैसी दिक्कतें बताई। हमने जब डॉ. कटियार से पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके पास प्रतिदिन ऐसे पांच-छह रोगी आते हैं, जो कुल 210 रुपये की दवा के 21 दिन के कोर्स से ठीक हो सकते हैं। जबकि वे हजारों की दवा खा डालते हैं।

कुछ तथ्य
- जिले में पैथोलॉजियों की संख्या 140
- सीबीसी की जांच हैलट में 20 रुपये
- सीबीसी की जांच निजी पैथोलॉजी में 250 रुपये
-इस्नोफीलिया होना चाहिए पांच प्रतिशत से कम
- इस्नोफीलिया खून का एक तत्व है
- इसके बढ़ने से व्यक्ति में एलर्जी बढ़ जाती है।
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