डॉ. अंसारी का कहना है कि पांच साल में करीब एक हजार रोगी ओपीडी में आए हैं। इनकी डायग्नोसिस में यह स्थिति उभरी है। उनका कहना है कि यह रोग ठीक नहीं होता लेकिन दवाओं से नियंत्रित रहता है। पहले रोगियों को दिक्कत दिवाली बाद ठंड पड़ने पर होती थी, लेकिन इस बार बारिश के बाद अचानक रोगियों की संख्या बढ़ गई है। कानपुर आर्थोपेडिक्स एसोसिएशन के सचिव और अस्थि रोग विभाग के स्पोर्ट्स क्लीनिक प्रभारी डॉ. चंदन कुमार का कहना है कि पांच वायरल संक्रमण के रोगी गठिया की चपेट में आ जाते हैं। वायरल संक्रमण के अलावा टायफायड रोगियों को भी यह दिक्कत हो जाती है। इसके अलावा बिगड़ी लाइफ स्टाइल खानपान के कारण भी यह दिक्कत हो जाती है।
केस: एक
नवाबगंज के रहने वाले ब्रज किशोर (35) ने बताया कि दो साल पहले उन्हें वायरल संक्रमण हुआ था। उस वक्त तेज बुखार और जोड़ों में दर्द था। बाद में बुखार तो ठीक हो गया लेकिन दर्द बना रहा। हैलट में इलाज चल रहा है। डॉक्टरो ने रियुमेटॉयड आर्थ्राइटिस बताया है। जाडे़ में दिक्कत अधिक बढ़ती है।
केस: दो
आजादनगर के रहने वाले कक्षा 12 के छात्र रत्नेश को वायरल फीवर हुआ। इसके दो हफ्ते बाद उसे टायफॉयड की पुष्टि हुई। अब उसके घुटनों, एड़ियों और हाथ के जोड़ों में दर्द रहता है। डॉक्टरों ने गठिया बताया है। उसका कहना है कि जाड़ों में जोड़ों में सूजन आ जाती है। डॉक्टर दवा की खुराक बढ़ा देते हैं।
गठिया के ये भी कारण
मोटापा, मादक पदार्थों का सेवन, जंक फूड, कंप्यूटर पर बैठ कर घंटों काम करना, व्यायाम न करना आदि।
ऐसे करें बचाव
खानपान में फास्ट फूड का इस्तेमाल न करें।
गलत तरीके से उठना, बैठना न करें।
यूरिक एसिड नियंत्रित रखें।
योगाभ्यास और नियमित व्यायाम करें।
सादा और पौष्टिक आहार लें।