छोटे भाई की सूचना पर डीसीपी वेस्ट विजय ढुल, एडीसीपी वेस्ट आकाश पटेल, एसीपी पनकी टीबी सिंह, पनकी थाने की पुलिस और फॉरेंसिक टीम पहुंची। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर भाई की शिकायत पर भवन स्वामी एडवोकेट को हिरासत में लिया है। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि पकड़ा गया व्यक्ति पूछताछ में बार-बार बयान बदल रहा है लिहाजा संदेह हो रहा है पूछताछ की जा रही है।
फतेहपुर का रहने वाला था परिवार
मूल रूप से फतेहपुर देवरी निवासी 45 साल के दयाराम बुधौली ग्राम्य विकास इंटर कॉलेज में समाज शास्त्र के टीचर थे। उनकी शादी 2009 में जहानाबाद बकेवर भैंसोली में रहने वाली संगीता देवी से हुई थी। उनके एक बेटा आदविक भी है। दयाराम बर्रा-8 में मकान बनाकर रहते थे। छोटे भाई अनुज ने बताया कि उनकी भाभी संगीता के हरबशपुर बिधनू निवासी पवन से प्रेम संबंध थे, दयाराम ने सितंबर में भाभी को रंगे हाथ पवन के साथ पकड़ लिया था। 24 सितंबर को संगीता ने पति को छोड़ दिया था। जिसके बाद से दयाराम अनुज की ससुराल रायपुर के पास जग्गूपुरवा में रहने लगे थे। यहीं से वे अपने कॉलेज पढ़ाने जाते थे।
कुछ दिन पहले ही दी थी जान से मारने की धमकी
अनुज ने बताया कि कुछ दिन पहले ही संगीता ने उनके भाई को जान से मारने की धमकी थी, इसके बाद लगातार फोन पर विवाद हुआ करता था। 25 जनवरी से संगीता उनके भाई को मिलने के लिए पनकी थानाक्षेत्र स्थित पतरसा गांव निवासी संजीव कुमार एडवोकेट के घर बुलवा रही थी। अनुज ने बताया कि दयाराम के साथ पढ़ाने वाले टीचर महेश का संजीव मिलने वाला था, इसी वजह से दयाराम ने उस पर विश्वास कर लिया। 28 जनवरी यानी रविवार सुबह भी संगीता की कॉल आई और उसने दयाराम को मिलने के लिए बुलाया।
भाई और उसके ससुर को बताकर पतरसा आए थे दयाराम
सुबह 10 बजे नाश्ता करने के बाद दयाराम भाई अनुज को फोन पर जानकारी देने और अनुज के ससुर राजेंद्र को जानकारी देकर पतरसा आ गए थे। अनुज ने पुलिस को बताया कि जब उसके भाई ने फोन किया तो उसने कहा कि बउआ बचा लेओ ई लोग आगी लगा दीन हैं। फिर इसी कॉल पर संजीव, पवन और संगीता का नाम बताया। जब तक वे लोग पहुंचे और आग बुझाई, तब तक दयाराम दम तोड़ चुका था। अनुज ने पुलिस को बताया कि उसके भाई ने बताया कि तीनों लोग उसकी पिटाई करने के बाद आग लगाकर भाग गए थे। अनुज ने बताया कि उसके भाई ने तड़प-तड़प कर जान दे दी।
समझौते के लिए संजीव भी कई बार कर चुका था फोन
अनुज ने पुलिस को बताया कि एडवोकेट संजीव इसी बिल्डिंग में निजी स्कूल चलाता है। वह कई बार दयाराम को फोन कर समझौता कराने की बात कहकर बुला चुका था। परिवार वालों की राय के बाद वे समझौते के लिए गए थे, जहां सभी ने मिलकर उनके भाई की हत्या कर दी।