कारखास को हर माह मोटी रकम भी देता है
विनोद काकादेव के डबल पुलिया कच्ची मड़ईया में रहता है। पुलिस ने जब विनोद का मोबाइल खंगाला, तो इंस्पेक्टर काकादेव विनय शर्मा के कारखास का नंबर मिला। पूछताछ में उसने यह भी बताया कि वह कारखास के संपर्क में है। उसके संज्ञान में ही वह इलाके में गांजा सप्लाई करता है। इसके एवज में कारखास को हर माह मोटी रकम भी देता है।
कारखास के खास के पकड़े जाने पर इंस्पेक्टर ने दी धमकी
विनोद और सौरभ के पकड़े जाने पर उनके परिजन काकादेव थाने पहुंचे। उन्होंने नवाबगंज पुलिस द्वारा दोनों को पकड़े जाने की सूचना दी। इससे गुस्साकर इंस्पेक्टर काकादेव विनय शर्मा ने इंस्पेक्टर नवाबगंज रोहित तिवारी को फोन कर धमकी दे डाली। विनय शर्मा ने कहा कि तुम जिन्हें पकड़कर ले गए हो।
एफआईआर दर्ज कर दूंगा...कोई बचा नहीं पाएगा
उनके घर वाले अपहरण की तहरीर लेकर आए हैं। एफआईआर दर्ज कर दूंगा। कोई बचा नहीं पाएगा। इस पर रोहित ने कहा कि अधिकारियों के आदेश पर कार्रवाई की है। जो आपको करना है कर दीजिए। इसके बाद रोहित तिवारी ने धमकी की जानकारी डीसीपी सेंट्रल प्रमोद कुमार को दी। इसके बाद डीसीपी ने जांच एडिशनल डीसीपी सेंट्रल आरती सिंह को सौंप दी है।
मादक पदार्थ तस्करों से इंस्पेक्टर का पुराना नाता
सूत्रों के अनुसार इंस्पेक्टर काकादेव का मादक पदार्थ के तस्करों से पुराना नाता रहा है। रायपुरवा में तैनाती के दौरान क्राइम ब्रांच की टीम ने उनके क्षेत्र से दो तस्करों को दबोचा था। इससे नाराज इंस्पेक्टर ने डीसीपी क्राइम और दबिश देने वाली टीम के खिलाफ बगैर सूचना दिए इलाके में दबिश देने पर नाम जीडी में चढ़ा दिया था। इसकी जांच अभी भी जारी है।
सेंट्रल जोन में तीन थाना प्रभारियों के खिलाफ चल रही जांच
सूत्रों के अनुसार सेंट्रल जोन में तैनात इंस्पेक्टर काकादेव के अलावा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कोहना व थानाप्रभारी नजीराबाद के खिलाफ भी आरोप हैं। इसकी प्राथमिक जांच चल रही है। इनके खिलाफ विवेचना में लापरवाही, अधिकारियों को घटनाओं की सूचना न देना, बगैर जानकारी एफआईआर दर्ज करना, वसूली समेत कई अन्य आरोप लगे हैं। इसके बाद भी उन्हें महत्वपूर्ण थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ड्रग माफिया संग सांठगांठ की जांच एडिशनल डीसीपी सेंट्रल को सौंपी गई है। इसकी रिपोर्ट तीन दिन में मांगी गई है। जांच रिपोर्ट बनाकर पुलिस कमिश्नर को सौंप दी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। -प्रमोद कुमार, डीसीपी सेंट्रल