यह स्थिति लगातार बढ़ रही है। शुरू के वर्षों में यदि एक महीने बाद किसी रोज भारी बारिश होती थी, जो अब जाकर दो और तीन महीने की भीषण गर्मी के अंतराल पर होने लगी है। वर्ष 1970 से 2000 तक हर वर्ष बारिश के दिन-50 से 60 होते थे। वहीं, वर्ष 2000 के बाद से अभी तक हर साल बारिश के दिन- 30 से 40 रह गए हैं।
जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में स्ट्रीम इवेंट्स (भीषण गर्मी, भारी बारिश, कड़ाके की ठंड) देखने को मिल रहा है। इस वजह से जमीन की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हुई है। मौसम जनित बीमारियों की एक वजह यह परिवर्तन भी बन रहा है। हमारे यहां पिछले 52 वर्षों के मौजूद मौसम के डाटा के आधार पर जो अध्ययन किया गया है, उसमें चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिसमें गर्मी के दिन ज्यादा बारिश के दिन कम और अचानक से तेज बारिश होने लगी है। - डॉ. एसएन पांडेय, मौसम विभाग प्रमुख, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी