22 साल बाद मिटा हत्या का कलंक तो छलक पड़े आंसू
हत्या का कलंक झेल रहे दिव्यांग को 22 साल बाद कोर्ट से न्याय मिल सका। कोर्ट का आदेश सुनने के बाद उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मौत के बाद उपजे आक्रोश के चलते जो एफआईआर दर्ज हुई, उसमें सुभाष के साथ-साथ उसकी पत्नी, उसके एक हाथ से दिव्यांग भाई और बुजुर्ग मां को भी आरोपी बना दिया गया था। दिव्यांग विनय के अधिवक्ता कमलेश पाठक ने एक गवाह के माध्यम से कोर्ट में साबित किया कि घटना के समय विनय आर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री में दोस्त से मिलने गया था। तर्क रखा कि एक हाथ से दिव्यांग पर मारपीट कर हत्या का आरोप हास्यास्पद है। बुजुर्ग मां पर गुम्मे चलाने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने दिव्यांग और वृद्धा को बरी कर दिया।
भीड़ ने विधायक के घर को भी बनाया था निशाना
जसविंदर की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। केबल ऑपरेटर्स ने हड़ताल कर दी थी। क्षेत्रीय लोगों ने सुभाष के घर और दुकान पर पथराव व तोड़फोड़ की थी। दुकान में आग लगाने की कोशिश की गई थी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराया था। अगले दिन शवयात्रा निकलने के दौरान बाजार बंद रहा। इस बीच भी लोगों ने तोड़फोड़ की थी। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए थे
तत्कालीन भाजपा विधायक सतीश महाना पर हत्यारोपियों की पैरवी करने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद भीड़ ने महाना के घर और स्कूल पर भी पथराव कर दिया था। स्कूल बस फूंकने की कोशिश पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए थे। व्यापारियों के बीच सतीश महाना के कहने पर मुकदमे दर्ज करने की अफवाह फैलाकर चिंगारी को हवा देने की कोशिश की गई थी। इस हत्याकांड के बाद कई दिनों तक शहर में सियासी हलचल मची रही थी।