अलनीनो का असर अभी दक्षिणी हिस्से में महसूस किया जा रहा है। इसके कारण मध्य और पश्चिमी प्रशांत महासागर की सतह पर तापमान में बदलाव दिख रहा है। धीरे-धीरे यह आगे बढ़ेगा। बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच गर्मी चरम पर होगी। ऐसा अनुमान है कि इस बार की गर्मी पिछले 122 वर्षों का रिकार्ड तोड़ सकती है।
इन वर्षों में सबसे ज्यादा रही है गर्मी
वर्ष 2016, 2019 और 2020 में भी अलनीनो के प्रभाव की वजह से सर्वाधिक गर्मी पड़ी थी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अध्ययन के अनुसार अभी से ऐसे संकेत मिल रहे हैं, कि अलनीनो का प्रभाव अधिक बढ़ने की वजह से मानसून भी कमजोर पड़ सकता है।
गर्मी तोड़ सकती है 122 वर्षों का रिकॉर्ड
डॉ. पांडेय के अनुसार मौसम विभाग के पास उपलब्ध पिछले 122 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार अभी तक वर्ष 2016 में सर्वाधिक गर्मी रही है। उसके बाद 2019 और 20 में लगातार ऐसा देखने को मिला। फिर अलनीनो के कमजोर होने से मौसम में बदलाव आया। अध्ययन में यह आशंका जाहिर की गई कि 2023 की गर्मी पिछले सभी आंकड़ों पर भारी पड़ सकती है।
यह होता है अलनीनो
मौसम विशेषज्ञ डॉ. पांडेय के अनुसार प्रशांत महासागर के सतह के ऊपर के तापमान में होने वाले बदलाव की प्रक्रिया अलनीनो कहलाती है। इसके बदलाव से पृथ्वी का तापमान गरम होने लगता है, जबकि लानीना की वजह से तापमान ठंड होता है।