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नगर निकाय चुनाव: इत्रनगरी फतह के लिए राजधानी में मंथन, एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में भाजपा-सपा

Sat, 15 Apr 2023 03:49 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले हो रहे नगर निकाय चुनाव के बहाने सियासी जमातें न सिर्फ ज्यादा से ज्यादा सीट पर अपना दबदबा कायम रखना चाहती हैं, बल्कि इसी बहाने जिले में अपनी सियासी पकड़ पर मजबूती दिखाने की भी जद्दोजहद में हैं। सपा जहां इस सियासी गढ़ में फिर से अपना वजूद तलाशने की जुगत कर रही है, वहीं भाजपा जीत के सिलसिले को लगातार कायम रखने के लिए रणनीति बना रही है।
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निकाय चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चुनाव तो नगर निकाय का है। लोग अपने शहर की सरकार की चुनेंगे पर प्रतिष्ठा सियासी जमातों की लगी हुई है। कन्नौज जिले की सभी सीट पर सपा और भाजपा के बीच होड़ मची है। कभी सपा के लिए सबसे मजबूत इलाकों में रहा कन्नौज अब उसके कब्जे में नहीं है। लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव में भाजपा ने सपा के इस किले पर कब्जा कर लिया है।

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लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले हो रहे नगर निकाय चुनाव के बहाने सियासी जमातें न सिर्फ ज्यादा से ज्यादा सीट पर अपना दबदबा कायम रखना चाहती हैं, बल्कि इसी बहाने जिले में अपनी सियासी पकड़ पर मजबूती दिखाने की भी जद्दोजहद में हैं। सपा जहां इस सियासी गढ़ में फिर से अपना वजूद तलाशने की जुगत कर रही है, वहीं भाजपा जीत के सिलसिले को लगातार कायम रखने के लिए रणनीति बना रही है। सपा का पूरा दारोमदार पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के हवाले है। वह राजधानी में बैठकर जिले की सभी आठों नगर निकायों पर निगाह लगाए हुए हैं।

दो दशक से लंबे सियासी जुड़ाव की वजह कर उनकी निगाह हर सीट पर है। उन्होंने बाकायदा पांच सीट पर प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। बाकी की तीन सीटों पर संगठन से जुड़े चेहरों के साथ मंथन कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा खेमे में अभी किसी सीट पर कोई पत्ता नहीं खुला है। अलग-अलग सीट से आए आवेदन और उसके अलावा भी कई चेहरों पर मंथन किया गया है। बाकायदा यहां कोर कमेटी की बैठक के बाद दावेदारों के नाम का पैनल बनाकर राजधानी भेज दिया गय है। टिकट का फैसला वहीं से होना है।

चुनाव दर चुनाव में शिकस्त से सपा के सामने बड़ी चुनौती
पहले लोकसभा चुनाव में सपा की दो दशक की बादशाहत खत्म हुई। फिर विधानसभा में भाजपा के हाथों तीनों सीट पर सूपड़ा साफ हुआ। उसके पहले पंचायत चुनाव में जिला पंचायत के अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद पर पूरी तरह भाजपा का कब्जा हुआ। विधानसभा चुुनाव के बाद स्थानीय निकाय के एमएलसी चुनाव में शिकस्त मिली। अपने गढ़ में भाजपा के हाथों लगातार शिकस्त खा रही सपा अब फिर से कमर कस रही है। दूसरी तरफ बसपा भी इस चुनाव के बहाने संगठन को सक्रिय कर अपना वजूद तलाशने में जुटी है। कांग्रेस भी इसी चुनाव के बहाने अपनी संभावना तलाश रही है।
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खुद अखिलेश ने संभाल रखा है मोर्चा
सपा की सियासी प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद पार्टी प्रमुख ही निगाह रखे हुए हैं। कभी यहां से लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा चुके अखिलेश यादव पिछले कुछ सालों में यहां पार्टी के प्रदर्शन को लेकर संगठन से भी नाराज रहे हैं। हालांकि अब चूंकि नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है तो फिर से संगठन को सक्रिय कर दिया है। जिलाध्यक्ष के रूप में फिर से कलीम खान की ताजपोशी कर उन्हें राजधानी बुलाकर आठ में से पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बची हुई तीन सीट कन्नौज सदर, तिर्वा और समधन की उम्मीदवारी पर भी वही मंथन कर रहे हैं।
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