फोरेंसिक लैब के बाहर फर्श पर बैठे अखिलेश यादव मोबाइल से जानकारी लेते रहे
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जैसी उम्मीद थी हुआ भी बिल्कुल वैसा ही। चुनाव के दौरान बढ़े ग्राफ के अचानक से ठिठक जाने से सियासतदानों के माथों की लकीरें आड़ी-तिरछी होने लगीं। शुरू के छह घंटे तक तेज हुई वोटिंग की रफ्तार के अलग ही मायने निकाले जाने लगे। उसके बाद के पांच घंटे में इस रफ्तार पर ब्रेक लगने लगा। इस बीच सपा और भाजपा से जुड़े लोगों के बीच बढ़ते टकराव की खबरों के बीच आखिरकार अखिलेश यादव को भी सैफई से यहां आना पड़ा।
इसके भी अलग ही मायने लगाए जा रहे हैं। चौथे चरण के तहत हुए चुनाव के दौरान देश भर की निगाहें इत्रनगरी पर लगी रहीं। सपा मुखिया के ताल ठोकने से यहां का सियासी दंगल सुर्खियों में आ गया। नतीजा यह कि नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार तक यहां की सियासी गतिविधियां सुर्खियों में रहीं। ऐसे में सोमवार को हुए मतदान के दौरान भी यहां से जुड़ी पल-पल की जानकारी के लिए जानकारों के फोन की घंटियां घनघनाती रहीं। यहां की सियासी तपिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पांचवें चरण के चुनाव प्रचार की तैयारी कर रहे अखिलेश यादव पहले तो सैफई में बैठकर ही यहां नजर जमाए रहे।
उसके बाद कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक ने उन्हें आखिरकार सैफई छोड़कर कन्नौज आने पर मजबूर कर दिया। न सिर्फ वह यहां आए बल्कि चार से पांच घंटे के दौरान कई जगह का जायजा भी लिया। उनका पूरा छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र पर रहा। तिर्वा के कुछ इलाकों के बूथ पर भी पहुंचे। उनके बाद के बाद यहां के सपा कार्यकर्ताओं के मनोबल में इजाफा हुआ। मुखिया को अपने बीच पाकर वह उत्साह से वोटर को बूथ पर पहुंचाने में जुट गए।
सपा में दिखी पिछली हार का बदला लेने की छटपटाहट
पिछले चुनाव में हुई कड़ी टक्कर के बाद मामूली अंतर से हुई हार के बाद भाजपा के हाथों अपना गढ़ को फिर से हासिल करने की छटपटाहट सपा कार्यकर्ताओं में दिखी। अखिलेश यादव भी चूंकि अपने गढ़ पर फिर से सपा का झंडा लहराने के लिए ही मैदान में उतरे हैं तो वह भी चुनाव को हल्के में नहीं लेते दिखे। यही वजह रही कि वह कार्यकर्ताओं के भरोसे मतदान की जिम्मेदारी छोड़ चुके अखिलेश खुद मैदान में उतरने से नहीं रोक सके। उनके यहां आने को उनके बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
सीट बरकरार रखने को सुब्रत भी डटे रहे, शिकायत करने से नहीं चूके
पिछले चुनाव में सपा के दशक की बादशाहत को खत्म कर सांसद बने सुब्रत पाठक अपनी कामयाबी को दोहराने के लिए पूरी ताकत से मैदान में डटे रहे। पूरे चुनाव के दौरान सपा और अखिलेश यादव पर पूरी तरह आक्रामक रहे सुब्रत पाठक चुनाव वाले दिन भी मैदान में डटे रहे। सुब्रह अपना वोट डालकर वह क्षेत्र भ्रमण पर निकल गए। कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेते रहे। जहां से कोई कमी या गड़बड़ी की शिकायत मिलती, उसकी शिकायत करने से नहीं चूकते। बाकायदा अपने लेटर हेड पर शिकायत लिखकर एक्स हैंडल पर पोस्ट कर निर्वाचन आयोग को आगाह करते रहे। उनके जुझारूपन की भी काफी चर्चा रही।