कानपुर की मेट्रो ट्रेनें लखनऊ से भी ज्यादा आधुनिक होंगी। कोचों में ऐसा उपकरण लगा होगा, जिसकी मदद से किसी इमरजेंसी पर यात्री सीधे चालक से बात कर सकेंगे। चालक मदद के लिए कंट्रोल रूम को सूचना दे देगा। इसके अलावा कोच यात्रियों की संख्या के हिसाब से कूलिंग करेंगे। ट्रेन के ब्रेक लगने पर पैदा होने वाली ऊष्मा से बिजली बनती रहेगी।
इससे ट्रेनों के संचालन में 30 प्रतिशत बिजली बचेगी। लिफ्ट से भी 25 प्रतिशत बिजली बचाई जाएगी। यह जानकारी गुरुवार को मोतीझील, हैलट, गीता नगर, गुरुदेव और आईआईटी मेट्रो स्टेशनों और डिपो में चल रहे कामों के निरीक्षण के दौरान यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव और निदेशक (परिचालन) सुशील कुमार ने दी।
85 प्रतिशत सिविल निर्माण पूरा
पॉलिटेक्निक में चल रहे डिपो के कामों का जायजा ले रहे एमडी ने बताया कि आईआईटी से मोतीझील तक 85 प्रतिशत सिविल कार्य हो गया है। इलेक्ट्रिक, सिग्निलिंग, टेलीकॉम, ट्रैक और ट्रैक्शन का भी 50 प्रतिशत काम हो गया है। शेष कार्य भी नवंबर तक पूरा हो जाएगा।
इतने कम समय में ट्रेन चलाने का एशिया में बनेगा रिकार्ड
एमडी ने बताया कि ट्रेन सितंबर के अंत तक आ जाएगी। डिपो भी इसी माह स्वागत के लिए तैयार हो जाएगा। आईआईटी से मोतीझील तक छह ट्रेनों की जरूरत है लेकिन आठ ट्रेनें मंगाई हैं। ट्रेनें तीन कोच की होंगी। नवंबर में ट्रायल के बाद जनवरी से ट्रेन चलने लगेगी। सबसे कम समय में मेट्रो चलाने का यह एशिया का रिकार्ड होगा।