अपने इस छोटे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अवैध खनन और अवैध बस स्टैंडों के खिलाफ अभियान चलाकर शहर की व्यवस्था को पटरी पर लाने का संदेश दिया लेकिन उनकी यह सख्ती काम नहीं आ पाई। इसके अलावा उन्होंने विधानसभा चुनाव में भी अपने नेतृत्व में अच्छी तरीके से कराया। वर्तमान में चल रहे नई सड़क के बवाल को भी उनके स्थानांतरण से जोड़ा जा रहा है। हालांकि पुलिस कमिश्नरी होने की वजह से लॉ एंड आर्डर के मामले में प्रशासन की जिम्मेदारी ज्यादा नहीं बनती है।
विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख जी. को जिस तरह से हटाया गया था, दोबारा भाजपा सरकार आने के बाद तय हो गया था कि नेहा शर्मा कुछ दिनों के लिए ही यहां रहेंगी। लोगों को झटका तब लगा जब यह पता चला कि नेहा शर्मा को यहां से हटाकर स्थानीय निकाय का निदेशक बनाया गया है। लोगों को उम्मीद थी कि यहां के बाद नेहा शर्मा किसी दूसरे जनपद में जिलाधिकारी बनाई जाएंगी। 2010 बैच की आईएएस नेहा शर्मा की पहली पोस्टिंग 2012 में बागपत में बतौर जिलाधिकारी हुई थी। 2013 में महानगर के सदर तहसील में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में भी काम कर चुकी हैं।