बिहार थानाक्षेत्र के कलानी गांव में खेत में वृद्ध किसान की कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी गई। शव नजदीक ही उसी के नलकूप में फेंक दिया। नलकूप में मिट्टी डालकर शव दबाने की कोशिश की गई। पुत्र ने लूटपाट के बाद हत्या का आरोप लगा गांव के एक युवक के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने मारपीट में मौत की बात स्वीकार की है। वह मानसिक बीमार भी है।
कलानी गांव निवासी रामऔतार यादव उर्फ बब्बन (90) गांव के बाहर खेत में झोपड़ी में रहते थे। सुबह-शाम खाना खाने घर जाते थे। मंगलवार शाम वह खेत गए थे लेकिन बुधवार की सुबह घर नहीं पहुंचे। पुत्र मोहन ने बताया कि वह पिता को देखने खेत जा रहा था। रास्ते में पड़ोसी हीरालाल ने एक मोबाइल फोन देते हुए बताया कि रात में उनका बेटा रजनेश उर्फ जुगनू किसी तरह रस्सी खोलकर घर से निकल गया था। बुधवार सुबह घर आया तो देखा उसके हाथ में मोबाइल था। पूछने पर बताया कि मोबाइल रामऔतार का है। मोबाइल लेकर वह खेत पहुंचा तो पिता का खून से लथपथ शव नलकूप के गड्ढे में मिला। सूचना पर पुलिस ने शव को निकलवाया और जांच की।
वृद्ध की गर्दन पर धारदार हथियार से वार और दोनों हाथ में चोट के निशान मिले। चारपाई से गड्ढे तक शव के घसीट कर ले जाने के निशान भी मिले हैं। शव को छिपाने के लिए कुछ मिट्टी भी डाली गई थी। बड़े बेटे मन्नूलाल ने रजनेश और उसके पिता हीरालाल के खिलाफ लूट और हत्या की तहरीर दी है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। मृतक के तीन बच्चों में दो बेटे एक बेटी है। तीनों की शादी हो चुकी है। थानाध्यक्ष शिवप्रकाश पांडेय ने बताया कि लूट जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। आरोपी रजनेश उर्फ जुगनू पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वह मानसिक बीमार है। उसने मारपीट और हत्या करने की बात कबूली है।
शटरिंग का काम करता था हत्यारोपी
ग्रामीणों ने बताया कि हत्यारोपी रजनेश पहले मुंबई के नासिक में रहकर शटरिंग का काम करता था। दो मार्च के बाद वह गांव आ गया था। यहां आने के कुछ दिन बाद उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। वह गांव में इधर-उधर भटकता रहता था। वह किसी को नुकसान न पहुंचाए या फिर कहीं भटककर न चला जाए इसके लिए पिता उसे बांधकर रखते थे। मंगलवार को वह कब रस्सी खोलकर भाग गया उन्हें भी पता नहीं चला।
अपने पास रखते थे फसल बिक्री के रुपये
बेटे मोहन ने बताया कि पिता बब्बन यादव फसल बिक्री के रुपयों के साथ जेवरात अपने साथ रखते थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने 21 हजार रुपये के गेहूं और 10 हजार रुपये की सरसों बेची थी। यही नहीं करीब 50 हजार के जेवरात भी पिता के पास थे। वह सब गायब है।