तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां, डॉक्टर ने संदीप को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर एएसपी शशिशेखर, सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश, कोतवाल राजेश पाठक जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों के बयान दर्ज किए। दिलीप और अभिषेक की हालत गंभीर देख कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया।
कानपुर हैलट में दिलीप को भी मृत घोषित कर दिया गया जबकि अभिषेक की हालत नाजुक है। कोतवाल राजेश पाठक ने बताया कि तीनों जन्मदिन की पार्टी मना रहे थे तभी छज्जा टूटकर गिरने से हादसा हो गया। जिसमें दो युवकों की मौत हो गई है। तीसरे की हालत गंभीर है।
चार भाईयों में बड़ा था संदीप
मृतक संदीप प्राइवेट नौकरी कर परिवार का पालन पोषण करता था। कुछ समय पहले उसका एक्सीडेंट हो गया था। पैर में चोट से वह घर पर ही था। दोस्त का जन्मदिन होने से वह भी साथ गया था। मौत की जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया। पति की मौत पर पत्नी पिंकी और अविवाहित भाईयों में रंजीत, अजीत और राजा बेहाल हैं।
होटल में काम कर करता था दिलीप
हादसे में मृत दिलीप शहर में एक होटल में काम करता था। छह भाई बहनों में सबसे बड़ा होने से परिवार की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। दिलीप की मौत से पत्नी शांति और मां सावित्री बदहवास हो गई। मृतक के दो बेटे और एक बेटी है।
कंप्यूटर ऑपरेटर है अभिषेक
गंभीर रूप से घायल हुआ अभिषेक जिला महिला अस्पताल में ठेकेदार के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता है। इसी के सहारे वह परिवार का पालन करता है। डाक्टरों के अनुसार उसके पैर, हाथ व अन्य हिस्सों में कई फ्रैक्चर हुए हैं। उसकी हालत गंभीर है।
14 साल में ही जर्जर हुई ढाई करोड़ की कॉलोनी
वर्ष 2009 में डूडा ने 96 आवासों वाली इस कालोनी का निर्माण कराया था। इस आवासीय योजना पर दो करोड़, 51 लाख, 18 हजार रुपये खर्च हुए थे और सी एंड डी एस ने आवासों का निर्माण कराया था। आवासहीन परिवारों को आवास दिए गए थे।
लेकिन घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किए जाने से यह आवासीय कॉलोनी महज 14 साल में ही जर्जर हो गई है। प्लास्टर टूटकर गिरता है और छतें दरक गई हैं। यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि छते और दीवारें इतनी कमजोर हैं कि ऊपरी मजिल पर कोई चलता भी है इतनी तेज धमक होती है कि मानों छत ही बैठ जाएगी।