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करोड़ों का कबाड़: 10 महीने में खड़े-खड़े कंडम हुईं ढाई करोड़ की ई-बसें, हादसों के बाद सीज बसों को नहीं छुड़ाया

Wed, 07 Dec 2022 11:46 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में 11 दिसंबर 2021 में ई-बस सेवा शुरू हुई थी। इसके बाद कई बार ई-बसें हादसों का शिकार हुईं। हादसों के बाद रेलबाजार थाने में सीज बसों को छुड़ाया ही नहीं गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में हादसों के बाद रेलबाजार थाने में सीज की गईं ढाई करोड़ की तीन ई बसें 10 महीने में कबाड़ हो गईं। इन्हें अभी तक छुड़ाया नहीं जा सका है। इन्हें संचालित करने वाली कंपनी पीएमआई की लचर पैरवी से इन्हें छुड़ाने में समय लग रहा है। एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 87 लाख रुपये है।

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11 दिसंबर 2021 को 20 इलेक्ट्रिक बसों के साथ शुरूआत हुई थी। बेड़े में धीरे-धीरे बसों का इजाफा हुआ। 19 नवंबर 2022 को 20 और ई बसों को शामिल करने के बाद इनकी संख्या 100 पहुंच गई। तीन ई बसें कम होने के बाद अब 97 ई बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं।
चार महीने में तीन हादसों में हुई जब्ती
पहला ई बस हादसा 21 जनवरी 2022 को टाटमिल चौराहे पर हुआ। इसमें छह राहगीरों की मौत हुई थी और नौ लोग जख्मी हुए थे। 10 फरवरी को घंटाघर के पास दूसरा ई-बस हादसा हुआ। इसमें 10 लोग घायल हुए थे। 10 मई को कृष्णा नगर के पास जीटी रोड पर ई-बस एक पेड़ से टकरा गई। तब से ये तीनों बसें रेल बाजार थाने में खड़ी हैं।

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60 लाख की बैट्री डिस्चार्ज
थाने में खड़ी बसों के शीशे टूट गए, टायर खराब हो गए। खिड़कियां टूटीं और गेट का ऑटोमेटिक सिस्टम और सेंसर बर्बाद हो गया। सीटें भी धूप और बारिश में सड़ चुकी हैं। ई-बस का सबसे कीमती उपकरण उसकी बैट्री होती है, जिसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये होती है। बैट्री डिस्चार्ज हो चुकी हैं।

छूटने के बाद इन्हें चेक कराया जाएगा कि यह मरम्मत लायक भी बची हैं या नहीं। बसों का संचालन और मरम्मत का जिम्मा उठाने वाली कंपनी पीएमआई के जीएम प्रवीण कुमार ने बताया कि हादसों के बाद जो ई-बसें थानों में सीज हैं। उन्हें छुड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि इसी महीने छुड़ा लिया जाएगा। इसके बाद इनकी मरम्मत कराकर रूट पर भेजा जाएगा।
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फिलहाल 100 बसों का शहर का कोटा पूरा हो गया है, लेकिन तीन बसों के सीज होने से शहर में 97 बसें ही दौड़ रही हैं। दुर्घटना की वजह से थाने में सीज बसों को छुड़ाने की कवायद चल रही है।  -डीवी सिंह, प्रबंधक, ई-बस सेवा
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