कानपुर। पहली जून से तमाम वित्तीय व्यवस्थाओं में बदलाव होने जा रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। नया टैक्स कृषि कल्याण सेस (.5 फीसदी) सर्विस टैक्स में जुड़ जाएगा। इससे हर तरह की सेवाएं महंगी हो जाएंगी। होटलों-रेस्टोरेंट में खाने पीने, वाॅटर पार्क में मस्ती करने, मूवी देखने, बस, ट्रेन, टैक्सी में यात्रा करने में अधिक जेब ढीली होगी। बीमा, बैंक की सेवाएं, मोबाइल के रीचार्ज, बिजली के बिल भी बजट पर असर डालेंगे। कुल मिलाकर राहत मिलने के बजाय महंगाई से जिंदगी का जायका थोड़ा और बिगड़ जाएगा।
पांच ट्रांजैक्शन की छूट खत्म, वेतन भोगियों के लिए अनलिमिटेड
बैंक ने एक माह में पांच बार लेनदेन करने की सुविधा खत्म करने की योजना बनाई है। अब उपभोक्ता एक माह में सिर्फ तीन बार ही ट्रांजैक्शन कर सकता है। इसके बाद ट्रांजैक्शन करने पर 50 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन चार्ज वसूला जाएगा। इसी तरह बैंक की किसी दूसरी शाखा में एक दिन में अधिकतम 25 हजार रुपये ही जमा किए जा सकेंगे। हालांकि सैलरी वाले ग्राहक अपने समूह के बैंकों के साथ साथ किसी भी अन्य बैंक के एटीएम से अनलिमिटेड ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। अभी स्टेट बैंक के एटीएम से महीने में पांच बार और अन्य बैंकों के एटीएम से तीन बार ही ट्रांजैक्शन की छूट थी।
कार खरीदना होगा महंगा
अभी फरवरी में आए बजट में कारों के रेट बढ़ाए गए थे। दो माह बाद ही एक बार फिर कारें महंगी होने जा रही हैं। अब 10 लाख रुपये से अधिक की कार खरीदने पर एक फीसदी अधिक रकम देनी होगी। यह रकम कार खरीदने वाला डीलर को टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) के तौर पर देगा।
दो माह पहले बढ़े थे रेट ः इससे पहले पेट्रोल, एलपीजी, सीएनजी कारों पर एक फीसदी, निश्चित क्षमता वाली डीजल कारों पर 2.5 फीसदी और एसयूवी पर चार फीसदी तक नया इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाया गया था।
एचआरए, एलटीए क्लेम के लिए देना होगा प्रूफ
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स डिपार्टमेंट ने पहली तारीख से वेतन भोगियों के लिए फार्म 12 बीबी भरकर जमा करने की आनिवार्यता कर दी है। यह फार्म उन्हें भरना होगा जो मकान किराया भत्ता (एचआरए), छुट्टी यात्रा भत्ता (एलटीए) छुट्टी यात्रा रियायत (एलटीसी) का विवरण देकर टैक्स में छूट पाना चाहते हैं। सीए अतुल मेहरोत्रा का कहना है कि पहले भी यह व्यवस्था थी लेकिन इसके लिए कर्मचारी की ओर से लगाए गए प्रूफ की अधिक जांच पड़ताल नहीं होती थी। अब कर्मचारी अपनी कंपनी को जो प्रूफ देगा उसके सत्यापन की जिम्मेदारी कंपनी के प्रबंधन की होगी। गलत पाए जाने पर कंपनी ही दोषी मानी जाएगी।