बच्चे की गंभीर हालत देख विलाप करती उसकी मां
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सांस नली में दवा अटकने से तीन माह के बच्चे की मौत हो गई। मां ने उसे सफर के दौरान बुखार का सिरप पिलाया था। सिरप उसकी सांस नली में चला गया। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। इलाज के लिए सैफई पहुंचते ही बच्चे की सांसें थम गईं। इस दौरान बच्चे के साथ मां भी छटपटाती रही। ये दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद की है।
रविवार को जिला अस्पताल में दोपहर लगभग 12 बजे सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव सड़रा की रूबी गोद में अपने तीन माह के बच्चे को लिए हुए बदहवासी की हालत में दाखिल हुई। रूबी के पिता जयशंकर भी साथ थे। रूबी ने डॉ. शत्रुघ्न को बताया कि बच्चे को बुखार के चलते उसने सिरप पिलाया था। उसके बाद से इसकी हालत बिगड़ रही है। डॉक्टर शत्रुघ्न ने जांच की तो पाया कि बच्चे के सांस लेने में दिक्कत हो रही है। दवा बच्चे की सांस नली में चली गई थी। इलाज से आराम न मिलने पर डॉक्टर ने सैफई रिफर कर दिया। रूबी के पिता जयशंकर ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया। सूचना के करीब पौन घंटे बाद एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची। रूबी अपने पिता जयशंकर के साथ बच्चे को लेकर सैफई रवाना हुई। सैफई के मिनी पीजीआई मासूम की मौत हो गई।
सड़रा गांव निवासी पिता जयशंकर ने बताया कि बेटी रूबी की ससुराल हरदोई के भिक्खापुरवा गांव में है। कुछ दिनों से पुत्री मायके में थी। रविवार को वह उसे ससुराल छोड़ने जा रहा था। टेंपो से दिबियापुर पहुंचे थे कि बच्चे को तेज बुखार आ गया। बेटी रूबी ने उसे सिरप पिलाया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। सैफई के अस्पताल की लिफ्ट में ही बच्चे की मौत हो गई। वे प्राइवेट वाहन से बच्चे को लेकर सड़रा गांव वापस आ गए।
पौन घंटे बाद आई एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर भी नहीं
बच्चे को सैफई ले जाने के लिए जिस 108 एंबुलेंस को बुलाया गया था। वह करीब पौन घंटे बाद अस्पताल पहुंची। बच्चे को सैफई ले जाने की तैयारी की जा रही थी कि पता चला कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं है। इस दौरान रूबी बच्चे की दुहाई देती रही। बाद में जिला अस्पताल से ऑक्सीजन सिलिंडर दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस रवाना हुई।
बच्चे को कुछ भी पिलाने या खिलाने में सावधानी बरतनी चाहिए। छोटे बच्चों को लेकर बताया जाता है कि उसके सिर को थोड़ा उठाकर कुछ पिलाया या खिलाया जाए। असावधानी से इस तरह के केस सामने आते हैं। हालांकि यह केस कुछ ज्यादा बिगड़ गया था। बच्चे को जो ट्रीटमेंट यहां दिया जा सकता था, वह दिया गया। ऑक्सीजन लगाई गई, सांस नली साफ करने का प्रयास किया गया। आराम न मिलने पर रेफर किया गया था।
-डॉ. शत्रुघ्न सिंह चिकित्सक, जिला अस्पताल