42.63 लाख की लागत में से सिर्फ 21 लाख ही अभी खर्च
वृक्षारोपण का काम और सिल्ट चैम्बर का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। इसी तरह रठिगांव के अमृत सरोवर का काम अभी चल ही रहा है। वहां घाट, सिल्ट चैम्बर, झंडारोहण स्थल और बेंचों का निर्माण होना अभी बाकी है। एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद सोलर लाइट भी अभी नहीं लगी हैं। 42.63 लाख रुपये की लागत में से सिर्फ 21 लाख रुपये ही अभी खर्च हुए हैं। गेट की गुणवत्ता यहां भी खराब मिली। इसकी जगह बड़ा गेट बनाने का आदेश दिया गया है।
अमर उजाला ने भी की पड़ताल
सीडीओ की जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद अमर उजाला ने भी इन दोनों अमृत सरोवरों के अलावा पहले पूर्ण दिखाए गए पतारा के ही बलहापारा के अमृत सरोवर की पड़ताल की, तो इसकी भी निर्माण के जिला पंचायत के दावे कागजी ही साबित हुए। साथ ही चंवर और रठिगांव के अमृत सरोवरों की हालत ज्यादा ही खराब मिली।
रठिगांव : सीढ़ी न कुर्सी, इंटरलॉकिंग भी धंसी
रठिगांव गांव में 42 लाख से अमृत सरोवर बनना था। यहां तालाब तो बन गया, लेकिन सीढ़ी नहीं हैं। बैठने के लिए कुर्सी नहीं हैं और जो इंटरलॉकिंग बिछाई गई, वह कई जगह धंस चुकी है। गेट भी पिलर के बजाय एंगल पर टिका दिया गया है। प्रधान प्रमोद कुमार ने बताया कि काम में लापरवाही बरती जा रही है। अभी कई काम अधूरे हैं। जो काम हुए भी हैं, वे मानक के अनुसार नहीं हुए हैं। डेढ़ साल बीतने पर भी निर्माण पूरा नहीं हुआ है जबकि एक साल में पूरा हो जाना चाहिए था।
चंवर : केवल इंटरलॉकिंग हुई, वह भी धंसी
अभी तक केवल 786 मीटर इंटरलॉकिंग का काम हुआ है। वह भी कई जगह क्षतिग्रस्त और धंसी हुई है। सीमेंट की छह बेंच टूटी पड़ी हैं। मुख्य गेट मानक से छोटा है।सरोवर के चारों ओर पाथवे, हाईमास्क लाइटिंग, बाउंड्रीवॉल, बेंच, इंटरलॉकिंग, प्रवेशद्वार, रंगाई-पोताई और पौधरोपण का काम अभी तक बाकी है। इस अमृत सरोवर की लागत 43 लाख रुपये है और निर्माण एक साल में पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन डेढ़ साल भी कई काम होने बाकी हैं।
बलहापारा: सिर्फ बॉर्डर बना, खोदाई भी पूरी नहीं
बलहापारा के अमृत सरोवर की जांच सीडीओ की रिपोर्ट में शामिल नहीं है। अमर उजाला ने मौके पर पड़ताल में पाया कि यहां सिर्फ बॉर्डर ही बना है। सरोवर की खोदाई भी ठीक से नहीं हुई है। बॉर्डर की इंटरलॉकिंग भी अभी अधूरी पड़ी है। प्रधान प्रतिनिधि राजेश सिंह का कहना है कि केवल खानापूरी हुई है। आधे-अधूरे बॉर्डर के अलावा कोई काम नहीं हुआ है। 64 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण एक साल में होना था पर डेढ़ साल बीत चुके हैं।
सड़क निर्माण में भी लापरवाही, जगह-जगह गड्ढे
सीडीओ की ओर से कराई गई जांच में बिल्हौर ब्लॉक के दो गांवों की सड़कों के निर्माण में भी लापरवाही मिली है। रौगांव की 550 मीटर की मुख्य सड़क से यशकरण पाल के घर तक सीसी रोड जिला पंचायत ने वर्ष 2021 में बनाई थी। सड़क कई जगह उखड़ गई है। इसी ब्लाॅक की सिंधौली ग्राम पंचायत में हनुमान मंदिर से रमेश के ट्यूबवेल तक 500 मीटर की सड़क करीब 18 लाख रुपये से खर्च हुए थे। इस सड़क पर भी बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत पर सीएम कार्यालय ने दिया था जांच का आदेश
जिला पंचायत की ओर से पतारा ब्लॉक में तीन, सरसौल में एक और घाटमपुर एक अमृत सरोवर बनाया जाना था। डेढ़ साल पहले काम शुरू हुआ था और एक साल में होना था। जिला पंचायत की ओर से चार सरोवरों का काम पूरा दिखाकर रिपोर्ट लगा दी गई थी। जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण ने इन कामों की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ से की थी। इस पर सीडीओ ने आठ कामों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी से कराई थी। कुछ जगह जांच खुद सीडीओ ने की थी। एक सप्ताह पहले ही सीडीओ ने रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
सीएम कार्यालय के आदेश पर जिला पंचायत के आठ कामों की जांच कराई गई थी। सभी कामों में खामियां मिली हैं। तालाब निर्माण की गुणवत्ता खराब मिली। सड़क निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग की गई। पूरी जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। वहीं से रिपोर्ट सीएम कार्यालय भेजी जाएगी। -सुधीर कुमार, सीडीओ