सपा को मान रही है मुख्य प्रतिद्वंद्वी
पिछली बार पार्टी ने पिछड़ी जाति के अवस्थी के रूप में लगातार दूसरी बार ब्राह्मण पर भरोसा जताया है। इस बार के चुनाव में जो परिस्थितियां दिख रही हैं। उसमें भाजपा, समाजवादी पार्टी को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानकर चल रही है।
पार्टी के हिसाब से मत मिलने पर शंका
इसी वजह से ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों में खींचतान शुरू हो गई है। इस बार ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वो किसकी और ज्यादा हैं। यह भी दिख रहा है कि एक दूसरे के यहां रिश्तेदारियां होने से भी पार्टी के हिसाब से मत मिलने पर शंका है।