ऐसे होता है तैयार पैनल
कौशल ने बताया कि पैनल को तैयार करने के लिए पराली के साथ कपड़े बनाने के दौरान वेस्ट होने वाले कॉटन फाइबर और अन्य रसायन को मिलाया जाता है। फाइबर का इस्तेमाल बांडिंग के लिए होता है। इसमें 75 फीसदी पराली और 25 फीसदी कॉटन व अन्य चीजों का इस्तेमाल होता है। पराली को धोकर सुखाने के बाद क्रश करते हैं और फिर उसमें अन्य पदार्थ को मिलाकर पैनल तैयार होता है।
कॉमर्शियल पैनल से अधिक कारगर
मुकेश ने बताया कि मार्केट में मौजूद 10 एमएम के कॉमर्शियल पैनल में साउंड को अब्जॉर्ब करने की क्षमता .29 से .35 एनआरसी (नॉइस रिडक्शन कोइफिशिएंट) होती है, जबकि इसकी क्षमता .34 है। कॉमर्शियल पैनल लगाने में प्रति स्क्वॉयर फीट 100 रुपये से 120 रुपये देने पड़ते हैं, जबकि पराली से तैयार पैनल मात्र 30 रुपये से 40 रुपये प्रति स्क्वॉयर फीट में उपलब्ध हो जाएंगे।
इन जगहों पर होता है पैनल का इस्तेमाल
साउंड अब्जार्ब पैनल का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री के अलावा स्कूलों के हॉल, म्यूजिक रूम, कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडिटोरियम में होता है। यह पैनल साउंड को अब्जार्ब कर इको की समस्या को खत्म करता है। जिन दीवारों पर यह पैनल लगे होते हैं, वहां आवाज इको नहीं करती है।