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Kanpur News: महापाैर शहर आना टाल रहीं, प्रदेश अध्यक्ष के सामने विरोधी पार्षद बना रहे हंगामे की रणनीति

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कानपुर। नगर निगम से भाजपा के निष्कासित पार्षदों और महापाैर के पुत्र का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, पार्टी जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित और महापाैर प्रमिला पांडेय के साथ पार्षदों की आठ घंटे चली बैठक का छह दिन बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला है। माना जा रहा है कि इसी विवाद के चलते महापाैर भी शहर आना टाल रही हैं। वहीं, विरोधी पार्षद भी 16 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी के सामने हंगामे की रणनीति बना रहे हैं।
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दरअसल, पिछले दिनों सदन की बैठक में भाजपा पार्षद अंकित माैर्य और पवन गुप्ता को महापाैर ने निष्कासित कर दिया था। उसके बाद से ही हंगामा मचा हुआ है। निष्कासित पार्षद इसकी वजह महापाैर के पुत्र अमित पांडेय बंटी को बता रहे हैं। चर्चा है कि पार्षदों को लेकर संगठन का मामला यदि नहीं सुलझ पाता है तो प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी का आगमन दूसरी बार भी टल सकता है। पंकज चाैधरी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार कानपुर आना है। पहले वह 13 जनवरी को आने वाले थे अब 16 जनवरी की तारीख निर्धारित हुई है।
निष्कासित पार्षदों के मामले में प्रभारी मंत्री की बैठक के बाद भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित और महापाैर प्रमिला पांडेय की बैठक में तय हुआ था कि एक दो दिन में मामले को खत्म कर लिया जाएगा। लेकिन उसके बाद से महापाैर बाहर हैं। इस वजह से बात आगे नहीं बढ़ पा रही है। सोमवार को निष्कासित पार्षदों में से एक पवन गुप्ता का ऑडियो भी वायरल हो गया जिसमें नगर निगम के जेई से पवन की उनके वार्ड में काम कराने को लेकर तू-तू, मैं-मैं हो रही है। हालांकि पवन गुप्ता का कहना है कि यह आडियो छह महीने से ज्यादा पुराना है जिसमे वह वार्ड में काम के लिए बात कर रहे हैं।
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विनायकपुर में बजरंग पार्क की जमीन को अवैध तरीके से महापौर के बेटों को बेचने के मामले में सोसाइटी के सचिव ने सारे कागज अधिकारी को उपलब्ध करा दिए हैं। अब सहकारिता अधिकारी ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। विनायकपुर निवासी रविंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि सुदर्शन हाउसिंग सोसाइटी के सचिव अम्बरीश सिंह ने अवैध तरीके से महापौर प्रमिला पांडेय बेटे अमित पांडेय व अनूप पांडेय को बेच दी। इस वजह से पार्क का सुंदरीकरण नहीं हो पा रहा है। इस मामले में सचिव से कागज तलब किए थे। इस उन्होंने आधे अधूरे कागज दिए थे। इस वजह से विस्तृत जांच नहीं शुरू हो पाई थी। अब सचिव ने आवास विकास परिषद के सहकारिता अधिकारी दिलीप कुमार को सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। इसके बाद जांच शुरू हो गई है। दिलीप कुमार ने बताया कि सभी दस्तावेज उपलब्ध हो गए हैं। कागजों की जांच कर रहे हैं। (संवाद)
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