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पांच साल के मवेशी की मौत, रिपोर्ट में बता दिया स्वाभाविक

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सिल्हौला बुजुर्ग गोशाला का निरीक्षण करती ग्राम सचिव। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। सिल्हौला बुजुर्ग गोआश्रय स्थल में शनिवार को मवेशी की मौत को स्वाभाविक बता पशु चिकित्सक ने रिपोर्ट बना दी, जबकि मवेशी की उम्र महज पांच साल थी। कागजों की बाजीगरी उजागर होने पर सीडीओ ने स्पष्टीकरण तलब करने की बात कही है। वहीं, जनपद के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के मुताबिक गाय की औसत आयु 12 साल के आसपास होती है।
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बता दें कि 9 अप्रैल को राजपुर ब्लॉक क्षेत्र के सिल्हौला बुजुर्ग गोआश्रय स्थल में पांच साल के एक मवेशी की मौत हो गई थी। ग्रामीणों ने सूखा भूसा देने व पानी की समुचित व्यवस्था न देने का आरोप लगाया था। इसके चलते पशु कमजोर होकर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं और मौतेें हो रही हैं। सिल्हौला बुजुर्ग में एक मवेशी की मौत का मामला समाचार पत्रों में सोमवार को प्रकाशित हुआ तो अफसर नींद से जागे। आनन-फानन सिकंदरा के डिप्टी सीवीओ डॉ. सीएल वर्मा, ग्राम सचिव नीलम कटियार, ग्राम प्रधान श्रवण यादव सहित अन्य लोग पहुंचे। पंचनामा भरकर मवेशी के शव को दफना दिया गया। बिना पोस्टमार्टम कराए डिप्टी सीवीओ ने पांच साल के मवेशी की मौत को स्वाभाविक बताकर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी। रिपोर्ट की हकीकत जब सीडीओ को पता चली तो उन्होंने जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही।
- गाय की औसत उम्र करीब 12 वर्ष के आसपास होती है। सिल्हौला बुजुर्ग गोआश्रय स्थल में मवेशी की स्वाभाविक मौत होने की लिखित रिपोर्ट डिप्टी सीवीओ ने दी है। उनसे मौत की सही वजह की जानकारी की जाएगी। - डॉ. देवकीनंदन लवानिया (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी)
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किसी मवेशी की मौत औसत आयु के आसपास स्वाभाविक मौत होती है, लेकिन सिल्हौला बुजुर्ग के गोआश्रय स्थल में पांच साल के मवेशी की स्वाभाविक मौत होना समझ से परे है और पशु चिकित्सक की रिपोर्ट लापरवाही पूर्ण लग रही है। डिप्टी सीवीओ ने रिपोर्ट भेजी है। बीडीओ व डिप्टी सीवीओ से जानकारी की जाएगी। रिपोर्ट की लापरवाही पर स्पष्टीकरण भी तलब किया जाएगा। - सौम्या पांडेय (सीडीओ)
विकास व पशु चिकित्सा अधिकारियों में बयानों में विरोधाभास
इस मामलों में विकास विभाग व पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों में खेमेबाजी दिखी। राजपुर बीडीओ वीएस शुक्ला ने कहा कि उन्हें मवेशी के दो-तीन दिन से बीमार होने की जानकारी मिली थी। पशु चिकित्सक ने रिपोर्ट में क्या लिखा, यह वही बता सकते हैं। वहीं मौके पर मौजूद रहीं ग्राम सचिव नीलम कटियार ने कहा कि मवेशी बीमार था। मौत के बाद पंचनामा भरने की कार्रवाई की गई है। पशु चिकित्सक की तकनीकी रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। वहीं, मवेशी का पंचनामा भरने वाले डिप्टी सीवीओ डॉ. सीएल वर्मा मवेशी की मौत स्वाभाविक होने की बात पर अड़े रहे, लेकिन मवेशी की कम उम्र होने की बात पर वह बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगी होने की बात कहते हुए मामले को टाल गए।
...तो क्या असलियत छिपाने को नहीं करते पोस्टमार्टम
मवेशी की मौत पर पशु चिकित्सक पोस्टमार्टम करते हैं। इसकी व्यवस्था भी है, लेकिन गोशालाओं में मवेशियों की मौत के मामले में पशु चिकित्सक पोस्टमार्टम न कर केवल पंचनामा भरने की कार्रवाई कर शव दफना देते हैं। जिससे मवेशी की मौत की असली वजह कभी सामने आ ही नहीं पाती और पशु चिकित्सक की मनमानी रिपोर्ट पर भरोसा करना पड़ता है।
एडीओ ने बताया तीन बोरी दाना तो डिप्टी सीवीओ की रिपोर्ट में निल
राजपुर। राजपुर ब्लाक के सिल्हौला बुजुर्ग गांव में दो बीघा भूमि पर अस्थायी गोआश्रय स्थल बना है। वर्तमान में यहां 30 गाय व दो बछड़े हैं। सोमवार को पहुंचे एडीओ पंचायत राजेंद्र कुमार विश्वकर्मा, डिप्टी सीवीओ डॉ. सीएल वर्मा को केयर टेकर राजपाल मौजूद मिला। उन्होंने गोशाला की साफ सफाई कराकर हौज में भरे गंदे पानी को बदलवाया। एडीओ पंचायत ने बीडीओ को दी जांच रिपोर्ट में बताया कि गोआश्रय स्थल में 15 क्विंटल बाजरे का भूसा, 10 क्विंटल गेहूं का भूसा व तीन बोरी चोकर दाना उपलब्ध है। वहीं, पशु चिकित्साधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में अनुमानित पांच क्विंटल सरसों का भूसा बताया। जबकि दाना व चोकर न होने की बात कही है। (संवाद)
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