छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी ने परीक्षा के दौरान मोबाइल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसका सर्कुलर मंगलवार को जारी किया गया है। यह पहली बार है जब मोबाइल के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है।
इससे पहले कालेज प्रबंधक, शिक्षक, कर्मचारी को मोबाइल लेकर आने की छूट थी। स्टूडेंट भी मोबाइल लेकर आते थे तो शिक्षक के पास जमा करके एग्जाम देते थे।
बीए, बीएससी, बीकॉम के रेग्युलर और प्राइवेट एग्जाम 5 मार्च से 30 अप्रैल तक होंगे। इसका शेड्यूल जारी कर दिया गया है। इस बार आब्जेक्टिव पैटर्न के पेपर भी होंगे। ऐसे में मोबाइल का इस्तेमाल नकल में हो सकता है। बाहर से पेपर हल कराने की गुंजाइश भी बरकरार रहेगी।
इसको देखते हुए यूनिवर्सिटी ने इस बार परीक्षा के दिन प्रबंधक, शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंट सभी के मोबाइल लाने पर रोक लगाई है। एक तरह से परीक्षा केंद्र नो सेलफोन जोन रहेगा। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने बताया कि परीक्षार्थी के पास मोबाइल मिलने पर उसे नकल की श्रेणी में रखा गया है।
सीएसजेएमयू से संबद्ध स्व वित्त पोषित महाविद्यालय एसोसिएशन ने भी सहमति जताई है। सबने कहा है कि प्रबंधक, शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंटों को पहले ही बता दिया जाएगा कि परीक्षा के दिन मोबाइल घर पर रखकर आएं। महाविद्यालय कैंपस में जो भी मोबाइल मिलेगा, उसे जब्त किया जाएगा।
सेल्फ फाइनेंस कालेजों के शिक्षकों को बनाएं परीक्षक
सीएसजेएम यूनिवर्सिटी से संबद्ध स्व वित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन ने सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के शिक्षकों को परीक्षक बनाने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि परीक्षक बनाने का नियम लचीला किया जाए। पांच साल तक काम करने की अनिवार्यता भी खत्म होनी चाहिए।
इस बारे में एसोसिएशन ने कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन को ज्ञापन दिया। कुलपति ने सकारात्मक फैसला लेने का भरोसा दिया है। मंगलवार को स्व वित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी, संयोजक डॉ. बृजेश भदौरिया और डॉ. रमाकांत ने कुलपति से मिलकर बताया कि नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने बीएड में पढ़ाने की अर्हता बदली है। अब बीएड, एमएड करने वाले भी बीएड क्लास में पढ़ा सकते हैं।
इसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। परीक्षा पारिश्रमिक के भुगतान का सवाल उठते ही कुलपति ने तुरंत एक्शन लिया। एक पेज का प्रोफार्मा जारी करके कहा कि कॉलेज स्टूडेंट की संख्या बताएं। पारिश्रमिक का भुगतान हो जाएगा। प्रतिनिधि मंडल ने बीए, बीएससी और बीकॉम का पेपर 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पर भेजने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए। कहा कि इससे दिक्कत आएगी। यह पैटर्न आब्जेक्टिव पेपर में चल सकता है।