प्रो. वर्मा ने कहा कि स्कूल जाने से पहले भी बच्चा घर पर रहकर कुछ न कुछ सीखता है। कई बार गिरकर चलना सीखता है, खाना खाना, दूसरों का सम्मान करना सीखता है। उसे किसी ट्यूशन या शिक्षक की जरूरत नहीं होती।
दुनिया घूमें, बंद कमरे में किताबी ज्ञान हासिल कर केवल परीक्षा पास की जा सकती है। इनोवेशन के लिए सबसे जरूरी है समस्या के बारे में पता करना। समस्याएं घर में नहीं मिलतीं, उनकी खोज में बाहर निकलना ही पड़ता है। किताबी कीड़ा न बनें, प्रैक्टिकल जानकारी पर फोकस करें। यह बात आईआईटी के फिजिक्स विभाग के पूर्व प्रोफेसर और शिक्षा सोपान आश्रम के को फाउंडर पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा ने कही।
विज्ञापन
अमर उजाला और छत्रपति शाहू जी महाराज विवि की ओर से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर आयोजित टेकऑफ-उड़ान तकनीक की कार्यक्रम में प्रो. वर्मा बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। उन्होंने छात्रों को मोटीवेट करने के साथ उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी भी लगाई गई।
प्रो. वर्मा ने मॉडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि छात्र मॉडल का निर्माण स्वयं करें। मॉडल अच्छा बने या न बने, पुरस्कार मिले या न मिले, यह काम आपके भीतर ज्ञान का भंडार जरूर भर देगा, जो आपके जीवन के हर कदम पर जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि तनाव के साथ की गई पढ़ाई जीवन में कहीं काम नहीं आती। यही वजह है कि आईआईटी में दाखिला लेने वाले कई जेईई टॉपर भी संस्थान की पहली परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं।
विज्ञापन
छात्र खुद को करें एक्सप्लोर
प्रो. वर्मा ने कहा कि स्कूल जाने से पहले भी बच्चा घर पर रहकर कुछ न कुछ सीखता है। कई बार गिरकर चलना सीखता है, खाना खाना, दूसरों का सम्मान करना सीखता है। उसे किसी ट्यूशन या शिक्षक की जरूरत नहीं होती। बच्चा खुद को एक्सप्लोर करता है। इसके बाद वह स्कूल पहुंचता है तो शिक्षा और शिक्षक के दायरे में बंध जाता है, खुद को एक्सप्लोर करने का मौका उसे नहीं मिलता। यह खामी है शिक्षाप्रणाली की जो बच्चों का दायरा सीमित कर देती है। इसलिए छात्र खुद को एक्सप्लोर करें।
पढ़ाई के साथ सामाजिक होना भी जरूरी
प्रो. वर्मा ने जेईई में अच्छी रैंक पाने वाले एक छात्र के आईआईटी में दाखिला लेने की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि छात्र के पिता ने दाखिले के समय बताया कि बच्चा दो साल घर से निकला ही नहीं, तब उसने ये रैंक पाई है। प्रो. वर्मा ने उन्हें सलाह दी कि संस्थान में संचालित फोटोग्राफी, डांस, म्यूजिक क्लब में भी छात्र को जाना चाहिए तो पिता ने मना कर दिया। अगले दिन छात्र आया और कहा कि संस्थान में रैगिंग होती है, यहां पढ़ाई नहीं करनी है। इस पर पड़ताल की गई तो पता चला कि प्रोफेसर छात्रों से बात कर रहे थे तो उसे रैगिंग लगी। प्रो. वर्मा ने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों से कहा कि इस कहानी से सीखना चाहिए कि सामाजिकता भी कितनी जरूरी है।
जोश और उम्मीद के साथ तकनीक का टेकऑफ
छत्रपति शाहू जी महाराज विवि और अमर उजाला की ओर से बुधवार को टेकऑफ-उड़ान तकनीक की कार्यक्रम का आयोजन विवि के ऑडिटोरियम में किया गया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों की कल्पनाओं का साकार रूप विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी में देखने को मिला। छात्रों ने अपने इनोवेटिव आइडिया पर आधारित विज्ञान के मॉडल प्रस्तुत किए तो वहीं तकनीक के विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों से छात्रों में नई सोच जगाई। कार्यक्रम का फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी हुआ।
कार्यक्रम में 38 स्कूलों के 1400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। 32 स्कूलों के छात्रों ने अपने-अपने इनोवेटिव मॉडल प्रस्तुत किए। फिजिक्स के पुरोधा पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा ने छात्रों का हौसला बढ़ाया। छात्रों ने उनसे सवाल भी किए। आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. समीर खांडेकर, विज्ञान भारती ब्रह्मावर्त के संयोजक कौस्तुभ ओमर ने भी अपने अनुभव बताकर छात्रों में जोश भरा। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सीएसजेएमयू के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, प्रो. एचसी वर्मा, प्रो. समीर खांडेकर, कौस्तुभ ओमर और निर्णायक मंडल में शामिल विवि के यूआईईटी की निदेशक डॉ. बृष्टि मित्रा, आईटी विभाग की हेड डॉ. राशि अग्रवाल, महासचिव विज्ञान भारती कानपुर प्रांत डॉ. सुनील मिश्र, नारायणा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक दीपेंद्र गोस्वामी ने दीप जलाकर की। इसके बाद अतिथियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षा सोपान के सचिव अमित कुमार बाजपेई और मुकेश श्रीवास्तव ने किया।
मॉडल बनाने वाले छात्रों को दिए टिप्स
विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी में मॉडलों को देखने के बाद पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा, आईआईटी के प्रोफेसर समीर खांडेकर ने उन्हें टिप्स दिए। कार्यक्रम की शुरुआत एआईटीएच के दिव्यांग छात्र अनंत वैश्य ने की। अनंत नाक से मोबाइल और बाएं हाथ से लैपटॉप चलाते हैं। उनकी कहानी सुनकर सभी ने उनके हौसले को सराहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा सोपान, विज्ञान भारती और नारायणा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस का सहयोग रहा।
वर्मा सर, एक सेल्फी प्लीज
क्रेज छात्रों में वर्मा सर का क्रेज देखने को मिला। वर्मा सर प्लीज, एक सेल्फी कहकर छात्र अंत तक उनको घेरे रहे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी छात्र उनसे सवाल पूछते रहे और वह सहर्ष जवाब देते रहे।
अखबार तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली तकनीक बताई
अखबार तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के बारे में भी छात्रों को बताया गया। इससे अतिथियों ने सराहा। प्रो. समीर ने कहा कि चाय की चुस्की के साथ अखबार की खुशबू से कई लोगों की सुबह होती है। प्रो. वर्मा ने कहा कि अखबार बनाने की प्रक्रिया काफी रोचक है जिससे कई जानकारियां मिली हैं।